Development

पूंजी के लिए पर्यटन : किसका लाभ, किसकी हानि?

विनाशकारी विकास की हवस में हमारे सत्ताधारियों ने उन छह गांवों को सिरे से भुला दिया है जिनकी जमीनों पर साठ के दशक में ‘सरदार सरोवर परियोजना’ बनाने वालों की बस्ती बसाई गई थी। आजकल उसी इलाके में ‘स्टैच्यू ऑफ…

सुप्रीम कोर्ट ने सुध ली पैदल यात्रियों की और कहा, देश भर में फुटपाथ का घोर अभाव पैदल यात्रियों का अपमान

हम आज जिस विकास के दौर से गुजर रहे हैं उसमें खासकर पैदल चलने वालों की इज्जत खत्म हो गई है। पैदल चलना मजबूरी का नाम हो गया है। हम आज जिस विकास के दौर से गुजर रहे हैं उसमें…

पंचायत के विकास के बगैर समग्र भारत का विकास नहीं हो सकता

केरल के पुलिस महानिदेशक संजीव पतजोशी बोल – हमें शहरी क्षेत्र की सभी सुविधाएं ग्रामीण क्षेत्र में भी उपलब्ध कराना होगी इंदौर, 15 मई। केरल के पुलिस महानिदेशक संजीव पतजोशी ने कहा है कि पंचायत क्षेत्र का विकास किए बगैर…

संवेदनहीन विकास और संकट में पृथ्वी का भविष्य

बढ़ते भौतिक विकास की दौड़ में मानव ने प्रकृति के साथ जो खिलवाड़ किया है, उसके दुष्परिणाम अब स्पष्ट दिखने लगे हैं—असामान्य तापमान, बदलता मौसम और प्राकृतिक आपदाएं इसका प्रमाण हैं। ‘विश्व पृथ्वी दिवस’ हमें यह याद दिलाता है कि…

विकास के नाम पर हम पर्यावरण को संगठित रूप से क्षति पहुंचा रहे, केवल सरकार के भरोसे न रहें

‘झंडा ऊंचा रहे हमारा’ अभियान के तहत संविधान में पर्यावरण पर परिचर्चा इंदौर, 15 जनवरी। पर्यावरण को सरकार की प्राथमिक सूची में शामिल होना चाहिए। देश में हर वर्ष 42 अरब टन कार्बनडाई आक्साईड पैदा हो रही है। इससे बचने …

समसामयिक : कबीर दास की उल्टी वाणी

चुनावी बुखार ऐसा ही होता है ! आप हमेशा ही सन्निपात में होते हैं, फिर आपको अहसास ही नहीं होता कि आप जो कह रहे हैं वह कहने लायक है या नहीं; और यह भी कि आप जिनका गर्व से,…

विकास : आँकड़े बदले हैं, गरीबी नहीं

आज फिर चुनावी राजनीति में गरीब और खास तौर से गरीबों की संख्या मुद्दा बनती जा रही है और संभव है काफी सारे मुद्दे हवा में उछालकर टेस्ट कर चुकी मोदी सरकार को अपनी यह ‘उपलब्धि’ चुनाव जिताने लायक लगे।…

‘गूंगी गुडिय़ाओं’ की बदौलत बदल रही है, गांवों की तस्वीर

तीन दशक पहले 73वें संविधान संशोधन की मार्फत पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं को आरक्षण मिला था। आज उस आरक्षण के बूते सक्षम हुईं महिलाओं की क्या स्थिति है? ग्रामीण महिलाएं घर सजाने, खाना बनाने, बच्चे पालने और कपड़े सिलने के अलावा…

प्रजातंत्र की शासन-प्रणाली

दुनियाभर के राजनीतिक विश्लेषक प्रजातांत्रिक शासन प्रणाली की अहमियत और श्रेष्ठता पर कमोबेश एकमत हैं। सभी मानते हैं कि अपनी तमाम कमी-बेसियों के बावजूद प्रजातांत्रिक व्यवस्था किसी भी समाज को बेहतर बनाने के लिए सर्वाधिक उपयुक्त है। प्रजातांत्रिक शासन प्रणाली…

विकास के बरक्स ‘यू-टर्न’ की युक्ति

विकास का मौजूदा मॉडल दरअसल विनाश को न्यौतता है, यह बात कोई दबी-छिपी नहीं रह गई है। ऐसे में कैसे हम अपने जीवन को जीने लायक बनाए रखें? हाल में बिज़नेस न्यूज-चैनल पर एक विज्ञापन देखा जिसमें बताया गया था…