Sarvodaya Press Service

सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक

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विचार : भीड़ भरी दुनिया में अकेलेपन की भीड़!

आज की भीड़ भरी दुनिया में मनुष्यों के मन में अकेलेपन का अहसास दिन दूना रात चौगुना बढ़ रहा है यह एक नयी बात है। भीड़ और अकेलापन दोनों एक-दूसरे से विरोधाभासी शब्द है। आठ अरब मनुष्यों के विचार, व्यक्तित्व…

ऊर्जा : सौर से सस्ती होगी बिजली

भले ही दो दिन बाद सर्वशक्तिमान माने जाने वाले अमरीका का राजपाट एक ऐसे व्यक्ति के हाथों में आ जाए जिसे जलवायु परिवर्तन पर हुआ ‘पेरिस समझौता’ जरा भी नहीं सुहाता, लेकिन लगातार बढ़ता तापक्रम ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों की…

राधा भट्ट : सम्मान से बड़ा प्रेरणादायक व्यक्तित्व

अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त राधा भट्ट का नाम गांधी-विनोबा युग के गांधीवादियों में प्रमुखता से शुमार किया जाता है। वर्ष 2025 में उन्हें पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किए जाने की घोषणा हुई है। सम्मान से बड़ा राधा भट्ट का कद है।…

गणतंत्र दिवस : प्रजातंत्र में पक्षधरता

प्रजातंत्र में निष्पक्ष चिंतन राज्य, सरकार और समाज को सर्वजन-हिताय बनाए रखता है, लेकिन हमारे यहां के मौजूदा पार्टी-प्रधान ढांचे ने पक्षधरता की बेहद कमजोर छवि बनाई है। नतीजे में समूचा तंत्र शिथिल होता जा रहा है। क्या हैं, पक्षधरता…

सुप्रीम कोर्ट से संवैधानिक अधिकार : मौसम और मजदूरी पर फैसले

आज के समय में जलवायु परिवर्तन और बेरोजगारी के मुद्दे हमारे सामने मुंह बाए खड़े हैं, इनसे निपटने के लिए सुप्रीमकोर्ट के फैसले भी मौजूद हैं, लेकिन किन्हीं अनजानी गफलतों, हितों या भूल जाने की राष्ट्रीय बीमारी के चलते उन्हें…

मोहन हिराबाई हिरालाल: ग्राम स्वराज के प्रेरणास्रोत

स्‍मृति शेष गांधीवादी और वन अधिकार कार्यकर्ता मोहन हीराबाई हीरालाल का 23 जनवरी 25 को नागपुर के एक अस्पताल में निधन हो गया। वे गढ़चिरौली जिले के लेखा-मेंढा गांव में ‘मावा नाटे मावा राज’ आंदोलन के स्तंभ थे। गांधी-विनोबा के…

गांधी का अस्पताल : प्राकृतिक चिकित्सा का तीर्थ-उरली-कांचन

गांधी के लिए आजादी का मतलब सर्वांगीण बदलाव था। इस मान्यता की एक बानगी महाराष्ट्र में पुणे के पास उरली-कांचन में उनके द्वारा बहुत जतन से स्थापित प्राकृतिक चिकित्सा केन्द्र है जहां अनेक कष्ट-साध्य बीमारियों का खुद महात्मा गांधी की…

बालिकाएं : आशा, आत्मबल और आत्मनिर्भरता

राष्‍ट्रीय बालिका दिवस : 24 जनवरी पर विशेष प्रतिवर्ष 24 जनवरी को राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाते हैं। इस दिन को मनाने की शुरुआत साल 2008 से हुई। पहली बार महिला बाल विकास मंत्रालय ने 24 जनवरी 2008 में राष्ट्रीय बालिका…

पुस्‍तक समीक्षा : उत्तराखंड आन्दोलन : अहिंसात्मक जनांदोलन

उत्तराखंड आन्दोलन आधुनिक भारत के इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय है, जो क्षेत्रीय अस्मिता, सामाजिक चेतना और अहिंसक संघर्ष का प्रतीक रहा है। यह आन्दोलन केवल एक नए राज्य की माँग तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके माध्यम से एक…

तीर्थाटन और पर्यटन

आजकल देश की अर्थव्यवस्था में उद्योग कहा जाने वाला पर्यटन खासी अहमियत रखता है, लेकिन क्या बरसों से हो रहे तीर्थाटन और देशाटन का आनंद इस पर्यटन से मिल पा रहा है? क्या अपने समाज और रास्ते में मिलने वाली…