केन्द्र सरकार द्वारा बनाए गए दो कानूनों और एक संशोधन के विरोध में इन दिनों देशभर में किसानों ने आंदोलन खडे कर रखे हैं। इन आंदोलन की बुनियादी मांगों के साथ गांधी की तजबीज भी जुड जाए तो कैसा हो?…
हम केवल ऊपरी तौर पर ही अनुमान लगा रहे हैं कि हाथरस ज़िले के एक गाँव में एक दलित युवती के साथ हुए नृशंस अत्याचार और उसके कारण हुई मौत से सरकार डर गई है। वास्तव में ऐसा कुछ भी…
शैलेश शुक्ला हाथरस की घटना के बाद पहले सोचा कि बेटी – बेटी है दलित हो या सवर्ण की। इसलिए जो इस मुद्दे पर जातिवादी विमर्श को हवा दे रहे थे मैंने उनको इग्नोर करना उचित समझा। अपने जीवन में कभी…
हमारे समय का सर्वग्राही सवाल उस लोकतंत्र से है, जिसका नाम लेकर तरह-तरह के रंगों, झंडों वाली राजनीतिक जमातें सत्ता पर चढती-उतरती रहती हैं। क्या सचमुच हम जिसे सतत वापरते हैं, वह लोकतंत्र ही है? दुनिया के लोकतांत्रिक देशों में…
विन्सेंट शीन लिखते हैं कि गांधी ने पूरी दुनिया की आत्म का छू लिया था। गांधी पर 1927 में रेने फुलम मिलर ने एक किताब लिखी। उसका शीर्षक था- लेनिन एंड गांधी। लेकिन तब तक गांधी को गंभीरता से नहीं…
महात्मा गांधी के समूचे जीवन को देखें तो उस पर एक ‘जंतर’ का प्रभाव साफ दिखाई पडता है। सबसे गरीब और कमजोर आदमी को ध्यान में रखकर अपने कामकाज और भविष्य को तय करने के इस ‘जंतर’ ने गांधीजी के…
भारत की ‘स्वर कोकिला’ कही जाने वाली लता मंगेशकर अपना 91वां जन्म दिन मना रही है| लता मंगेशकर का जन्म 28 सितंबर 1929 को मराठी बोलने वाले गोमंतक मराठा परिवार में, मध्यप्रदेश के इंदौर में हुआ था। उनके पिता पंडित…
लोगों की जिंदगियाँ जैसे शेयर बाज़ार के सूचकांक की शक्ल में बदल गयी हैं। सूचकांक के घटने-बढ़ने से जैसे बाज़ार की माली हालत की लगभग झूठी जानकारी मिलती है, लोगों के मरने-जीने की हक़ीक़त भी असली आँकड़ों की हेरा-फेरी करके…
संसद के दोनों सदनों में इन और इन जैसी अनेक बातों को अनदेखा करके कानून बनवाने में जिस बात की सर्वाधिक अहमियत है, वह है सत्तारूढ़ भाजपा को मिला बहुमत। इसी तरह का बहुमत पहले की अनेक सरकारों ने भी…
हरिवंश नारायण सिंह के ‘सभापतित्व ‘में राज्यसभा का कुछ ऐसा इतिहास रच गया है कि पत्रकारिता और सत्ता की राजनीति के बीच के घालमेल को लेकर पीछे मुड़कर देखने की ज़रूरत पड़ गई है। सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश मार्कण्डेय…