गैर-सरकारी समाजसेवी संस्थाएं सरकार से समान दूरी रखते हुए उसे आइना दिखाते रहने के लिए भी खडी की जाती रही हैं, लेकिन आजकल इन संस्थाओं का चाल-चरित्र और चेहरा बदल-सा गया है। ‘एनजीओ’ के नाम से पुकारी जाने वाली ये…
नागरिकों की नाराज़गी शायद इस बात को लेकर ज़्यादा है कि उनके ‘तात्कालिक भय’ अब उन्हें एक ‘स्थायी भयावहता’ में तब्दील होते नज़र आ रहे हैं। बीतने वाले प्रत्येक क्षण के साथ नागरिकों को और ज़्यादा अकेला और निरीह महसूस…
अहिंसा का रास्ता ही लोकनायक जे.पी. ने पकड़ा था। उनके बनाये सम्पूर्ण क्रांतिदूतों ने भी अहिंसा को ही अपनाया है। इनके जीवन में अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्यचर्य, असंग्रह, शरीर-श्रम, अस्वाद, सर्वत्र भयवर्जन, सर्वधर्म समानत्व, स्वदेशी स्पर्श भावना को विनम्रतापूर्ण से…
मुद्दा यह भी है कि नीतीश के ख़िलाफ़ नाराज़गी कितनी ‘प्राकृतिक’ है और कितनी ‘मैन्यूफ़्रैक्चर्ड’ ।और यह भी कि भाजपाई शासन वाले राज्यों के मुक़ाबले बिहार की स्थिति कितनी ख़राब है ?किसी समय मोदी के मुक़ाबले ग़ैर-कांग्रेसी विपक्ष की ओर…
प्रधानमंत्री की अगुआई में देशभर में ‘आत्मनिर्भरता’ की दुंदुभी बज रही है। लगभग हरेक क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की जुगत बिठाई जा रही है, लेकिन क्या मौजूदा विकास के ताने-बाने के साथ-साथ वास्तविक आत्मनिर्भरता संभव हो सकेगी? क्या इस आत्मनिर्भरता…
चिंता इस बात की नहीं है कि एक पारसी मालिक के आधिपत्य वाली कम्पनी द्वारा जारी विज्ञापन का इतने आक्रामक तरीक़े से विरोध किया गया ( गांधीधाम, गुजरात में तो धमकियों के बाद ‘तनिष्क’ के एक शोरूम के बाहर एक…
सात दशक पहले, आजादी के आसपास के महात्मा गांधी को देखें तो इन सवालों के जबाव पाए जा सकते हैं। केवल दो बातों – आर्थिक और राजनीतिक के बारे में गांधी क्या कहते थे? गांधी विचार की प्राथमिक पाठशाला का…
देशभर में अनुमानतः जो बीस करोड़ टीवी सेट्स घरों में लगे हुए हैं और उनके ज़रिए जनता को जो कुछ भी चौबीसों घंटे दिखाया जा सकता है, वह एक ख़ास क़िस्म का व्यक्तिवादी प्रचार और किसी विचारधारा को दर्शकों के…
जेपी की संपूर्ण क्रांति के मूल में स्वतंत्रता समता और बंधुत्व की ही अवधारणा है। उन्होंने उसे भारतीय संदर्भ और अपने अंतरराष्ट्रीय अनुभवों से नया रूप दिया था। वे अपनी नैतिकता में हमारी पतित होती राजनीतिक व्यवस्था का शुद्धीकरण करना…
राजगोपाल पीव्ही कुछ दिन पहले खेती-किसानी से जुडे दो कानूनों के बनने और एक कानून के संशोधन ने देशभर के किसानों में बवाल खडा कर दिया है। ऐसे में बरसों से कृषि और जमीन के मुद्दे पर सक्रिय ‘एकता परिषद’…