Sarvodaya Press Service

सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक

विचार

किसान आंदोलन : अपने पाले में आंदोलन

‘गणतंत्र दिवस’ की 26 जनवरी पर पुलिस, प्रशासन और आंदोलनकारी किसानों के नेतृत्व के कतिपय हिस्से द्वारा अपनी-अपनी वजहों से की गईं गफलतों ने हिंसा और अराजकता का अप्रिय माहौल बना दिया था। लगने लगा था कि आजादी के बाद…

महामारी के बाद शुक्रिया अदा करने का वक़्त

कोविड योद्धाओं ने जब काम शुरू किया तो उन्हें अन्दाज़ा नहीं था कि यह कब ख़त्म होगा। हर गुज़रते हफ्‍़ते के साथ यह साफ़ होता गया कि यह संकट उनकी कल्पना से कहीं ज़्यादा लम्बा है। देखते-देखते सितम्बर आ गया,…

जीवन का प्रतीक है – आंदोलन

किसी भी समाज में होने वाले आंदोलन उस समाज की जीवन्तता का प्रतीक होते हैं और इस लिहाज से देखें तो दिल्ली की सीमाओं पर जारी किसान आंदोलन, अपने तमाम सवालों के अलावा कृषि-क्षेत्र की जिन्दादिली का प्रतीक भी है।…

नए दशक की दहलीज पर खड़ा गणदेवता

‘गणतंत्र दिवस’ की 26 जनवरी 71 साल पहले हमें अपने संविधान को अंगीकार करने की याद तो दिलाती ही है, साथ ही एक नागरिक की हैसियत से हमें अपने कर्तव्‍यों का बोध भी कराती है। इक्‍कीसवीं सदी के तीसरे दशक…

ख़ौफ़ के साए में एक लम्बी अमेरिकी प्रतीक्षा का अंत!

बीस जनवरी दो हज़ार इक्कीस को वाशिंगटन में केवल सत्ता का शांतिपूर्ण तरीक़े से हस्तांतरण हुआ है, नागरिक-अशांति की आशंकाएँ न सिर्फ़ निरस्त नहीं हुईं हैं और पुख़्ता हो गईं हैं। देश की जनता का एक बड़ा प्रतिशत अभी भी…

पत्रकार, पत्रकारिता और किसान आंदोलन

राजदीप अम्बानी-अदाणी को हो रहे नुक़सान की चर्चा करते हुए इस बात का ज़िक्र नहीं कर पाए कि किसी भी आंदोलन का इतना लम्बा चलना क्या यह संकेत नहीं देता कि सरकार के वास्तविक इरादों के प्रति किसानों का संदेह…

न्याय होना बनाम न्याय होते हुए दिखना

न्यायाधीश को सिर्फ निष्पक्ष और स्वतंत्र होना ही नहीं चाहिए, बल्कि दिखना भी चाहिए। इसी के बाद वह शब्द हमें ज्यादा सुनाई देने लगा, जिसे अंग्रेजी में Recuse कहते हैं। जब न्यायाधीश या कमेटी का कोई सदस्य अपने स्वविवेक से…

राष्‍ट्रवाद और आत्‍मनिर्भरता पर क्‍या कहते थे, ‘गुरुदेव?’

‘गुरुदेव’ रवीन्‍द्रनाथ टैगोर की बात करें तो राष्‍ट्रवाद और आत्‍मनिर्भरता का उल्‍लेख आ ही जाता है, लेकिन क्‍या उनके हवाले से ये दोनों मूल्‍य ठीक उसी तरह जाने-पहचाने जा सकते हैं जिस तरह आजकल इन्‍हें उपयोग किया जा रहा है?…

किसान भारत की आत्मा है, उसे सम्‍मान दें

किसान और सरकार वार्ता के छः दौर पूरे हुए है। सीधी मामूली माँग है। किसान विरोधी जो तीन कानून अलोकतांत्रिक तरीके से बनाये है, उन्हें जल्दी से जल्दी रद्द करो। इस मांग के ऊपर ज्यादा संवाद या वार्ता में समय…

सरकार की साथी, गैर-सरकारी संस्‍थाएं

गैर-सरकारी समाजसेवी संस्‍थाएं सरकार से समान दूरी रखते हुए उसे आइना दिखाते रहने के लिए भी खडी की जाती रही हैं, लेकिन आजकल इन संस्‍थाओं का चाल-चरित्र और चेहरा बदल-सा गया है। ‘एनजीओ’ के नाम से पुकारी जाने वाली ये…