विचार

कब तक कहते रहेंगे कि कोई डर नहीं लग रहा ?

चारों तरफ़ भय और आतंक का माहौल है। नई-नई सत्ताएँ आए दिन प्रकट हो रही हैं जो नागरिकों को डरा रही हैं। सत्ता प्रतिष्ठान या तो नागरिकों को सुरक्षा प्रदान करने में निकम्मा साबित हो रहा है या फिर अपराधी…

मानवता के लिए सार्थक बने मानवाधिकार दिवस 

10 दिसम्बर : मानवाधिकार दिवस समाज में मानवाधिकारों के होने वाले उल्लंघन के प्रति अगर मानव ही जागरूक नहीं है तो फिर इनका औचित्य क्या है? देखे तो पता चलेगा की कितने मानवाधिकारों का हनन मानव के द्वारा ही किया…

समाज : अमानवीकरण की महापरियोजना

पूंजी के फलने-फूलने के तौर-तरीकों में एक है, इंसानों को इंसानियत से बेदखल करके उन्हें मशीनों में तब्दील कर देना। मानवीय गुणों से वंचित मशीन-रूपी इंसान पूंजी के उत्पादन और मुनाफा कूटने के लिए बेहद मुफीद होता है। क्या होती…

इज़रायल और फिलिस्तीन : मध्य-पूर्व में मौत का तांडव

इन दिनों दुनियाभर को हलाकान करने वाले दो भीषण युद्धों में से एक,इजरायल और मध्य-पूर्व के देशों का है। इजरायल, जिसने हिटलर के हाथों अभी पिछली सदी में ही मानव इतिहास की भीषणतम त्रासदी झेली है,एक मदमस्त गुण्डे की तरह…

प्रकृति प्रदत्त वाणी एवं मनुष्य कृत भाषा !

प्रकृति प्रदत्त ज्ञानेंद्रियों और मनुष्य की सृजनात्मक एवं विध्वंसात्मक प्रवृत्तियों की निरन्तर जुगलबंदी ने आज की दुनिया को एक ऐसे मुकाम पर पहुंचा दिया है कि जहां तक पहुंच कर हम समूची सभ्यता की सृजनात्मक शक्ति बढ़ा और नष्ट-भ्रष्ट भी…

जीवन से जुड़ी आजीविका

जीवन की तरफ पीठ देकर खड़ी की जा रही समृद्धि ने क्या हमें उस बुनियादी सुख से भी वंचित कर दिया है, जो इस तमाम खटराग का अंतिम लक्ष्य होना चाहिए? और यदि यह सही है तो फिर क्या हमें…

वेपराइजेशन ऑफ़ हिंदू फेस्टिवल : त्यौहारों के तनाव

हमारे यहां त्यौहार सदियों से आपसी मेल-जोल और सामूहिक आनंद के प्रतीक रहे हैं और आमतौर पर इन्हें धर्म की बजाए क्षेत्रीय विशेषताओं के आधार पर मनाया जाता है। बंगाल में दुर्गा-पूजा या गुजरात में नवरात्रि धर्म की बजाए स्थानीयता…

प्रजा के हित में प्रजातंत्र

अपनी शुरुआत में भले ही प्रजातंत्र ने गहरी असहमतियां झेली हों, लेकिन धीरे-धीरे वह एक ऐसी शासन-प्रणाली बन गया जिसके बिना दुनिया के अधिकांश देश अपने काम-काज नहीं चला पाते। जिन देशों में प्रजातंत्र नहीं है वहां उसे लाने के…

बाल विवाह पर ‘बड़ी अदालत’ का फैसला

पिछले हफ्ते बाल विवाह पर दिए गए अपने अहम फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ‘बाल विवाह के कारण स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और जीवन के अवसरों से वंचित होना समानता, स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के संवैधानिक सिद्धांतों…