अंतरराष्ट्रीय

पेंडुलम (लोलक) के सिद्धांत को लागू करके नई सकारात्मक आदतों के विकास के बारे में सोचे : प्रो. आर्थर इसेनक्राफ्ट

इंदौर, 9 जनवरी। पेंडुलम pendulum के सिद्धांत को नियमित रूप से लागू करके, कोई भी नई सकारात्मक आदतें बना सकता है जो उन्हें व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन दोनों में अच्छी तरह से काम आएगी। विज्ञान शिक्षण के अंतर्गत पेंडुलम (लोलक)…

अंतरराष्‍ट्रीय : पनामा में पर्यावरण के लिए प्रतिरोध

मौजूदा विकास की अवधारणा के चलते दुनियाभर में प्रतिरोध हो रहे हैं। हाल में मध्य अमेरिकी देश पनामा Panama में तांबे की खदान के विरोध में आम लोगों ने प्रदर्शन किया और सुप्रीम कोर्ट तथा राष्ट्रपति को अपनी बात समझा…

75वीं दहलीज : संयुक्त राष्ट्र सार्वभौम घोषणा-पत्र व मानवाधिकार का सच

10 दिसंबर मानव अधिकार दिवस पर विशेष अपने उत्थान और पतन की पर्याप्त बहस में उलझा इंसान सार्वभौम घोषणा पत्र के 75 वर्ष बाद यह आँकलन कर रहा है कि हमने अपनी प्रतिबद्धताओं के साथ क्या किया? मानवाधिकारों के संरक्षण…

खेल में खनकती पूंजी

हाल में भारत में हुए वन-डे विश्वकप क्रिकेट के आयोजन ने एक तरफ दुनिया-जहान के खेल प्रेमियों में हलचल मचाई, तो दूसरी तरफ एक बार फिर उजागर कर दिया कि क्रिकेट असल में खेल की बजाए दिनोंदिन पूंजी काटने का…

मामूली नहीं है एआई (AI) का संकट

कृत्रिम बुद्धि का विकास इस तरह से हो रहा है कि यह मनुष्य की बुद्धि से कई कदम आगे निकल सकती है| इसी कारण इसके बहुत खतरनाक होने की आशंका बढ़ जाती है| किसी भ्रष्ट और विध्वंसकारी उद्देेश्य से यदि…

स्वार्थ की सत्ता ने खड़ा किया इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष

अंग्रेजों की नजर से ‘मिडिल-ईस्ट’ यानि ‘मध्य-पूर्व’ माने गए अरब देशों में जिस तरह की आपसी और आंतरिक लडाईयां जारी हैं, हाल का इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष उसी का एक विस्तार है। योरोप और अमरीका के अमीर देशों की तेल और दूसरे…

नरगिस मोहम्मदी : हिरासत में जीता, शांति के लिए नोबेल पुरस्कार

अपनी राजनीति, बाजार-हितैषी चरित्र और नस्ली पूर्वाग्रहों के बावजूद नार्वे की नोबेल पुरस्कार समिति कभी-कभार कमाल कर देती है। इस बार उसने यह कारनामा ईरान की जेल में बंद मानवाधिकार कार्यकर्ता नरगिस मोहम्मदी को शांति के नोबेल के लिए चुनकर…

ब्राजील से ”विश्व जल शांति अभियान” का आगाज : अहिंसामय समाज के निर्माण की पहल

मानवता पर आए संकट का समाधान अब प्राकृतिक सुरक्षा में ही है। आज का हमारा आर्थिक ढांचा बहुत विस्तार पा गया है। इससे जलवायु परिवर्तन के संकट ने चारों ओर असुरक्षा पैदा कर दी है। इस प्राकृतिक सुरक्षा कवच की…

साहित्यकार Milan Kundera मिलान कुंडेरा : किसी का चुपचाप बोलना

अलविदा मिलान कुंडेरा अंतर्राष्ट्रीय ख्यातिलब्ध उपन्यासकार 94 वर्षीय Milan Kundera मिलान कुंदेरा का 12 जुलाई को निधन हो गया। ‘द अनवियरेबल लाइटनेस ऑफ वींग’ उनका मशहूर उपन्यास है। पहला उपन्यास ‘द जोक’ 1967 में प्रकाशित हुआ था, जिसमें चेकेस्लोवाकिया कम्युनिष्ट…

ओबामा पहले अमेरिका के गिरेबान में झांक कर देखें!

ओबामा को समझाया जाना चाहिए कि मोदी-शाह-योगी भारतीय संस्कृति की मूल आत्मा नहीं हैं। भारत की मूल आत्मा सर्वधर्म समभाव की है और यही राष्ट्र का स्थायी चरित्र है। ऐसा नहीं होता तो सवा दो सौ सालों (1526-1761) में मुग़ल…