स्‍वास्‍थ्‍य

कोरोना-काल में हारते ‘काल’ के देवता

भले ही कोरोना वायरस से उपजी ‘कोविड-19’ बीमारी दुनियाभर को हलाकान कर रही हो, लेकिन आंकडों को देखें तो इसके ठीक उलट, डर की कोई बात दिखाई नहीं देती। उलटे, ‘कोविड-19’ से होने वाली मौतों को सामान्‍यत: होने वाली मौतों…

कोविड-19 : कुछ सबक, कुछ सवाल

कोविड-19 को ‘परास्‍त’ करने की आपाधापी में कई तरह की गफलतें हो रही हैं और ऐसे में सरकारें अपनी-अपनी ‘पीठ ठुकवाने’ में मशगूल हैं। कहा जा रहा है कि महामारी मानी जाने वाली इस बला से हम अव्‍वल और बेहतर…

मौत के भय की समाप्ति या व्यवस्था के प्रति तिरस्कार!

आत्म निर्भर बनाए जा रहे देश के लोग इस समय बड़ी संख्या में कोरोना की अंधेरी गुफा में प्रवेश करते जा रहे हैं, पर उन्हें कोई प्रशिक्षण नहीं है कि प्रार्थनाएँ और अनुशासन क्या होता है ! जो पीड़ित हैं…

चिकित्सा और ई वेस्ट का निपटान: उपेक्षित नजरिया

प्रतिदिन 550.9 टन चिकित्सा अपशिष्ट उत्सर्जित करने वाला और 70 प्रतिशत इलेक्ट्रॉनिक कचरे को पैदा करने वाला अपना देश दुनिया का पाँचवां सबसे बड़ा देश है। मोबाइल फोन, कंप्यूटर और ढेरों इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स की रद्दी में भरमार हैं, लेकिन इन…

आयुर्वेद में आस्था संकट का हल क्या है ?

आयुर्वेद चिकित्सा प्रणालियां आज की दुनिया में वैकल्पिक उपचार मानी जाती हैं। आयुर्वेद में विज्ञान, कला और दर्शन का त्रिवेणी संगम है जो व्यक्ति को स्वस्थ जीवन जीने की जीवनशैली से परिचित कराती है। आधुनिक चिकित्सा शैली के सहारे किसी…

‘कोविड-19’ के काम में सरकारी, गैर-सरकारी सुविधाएं

सुरभि अग्रवाल, शोभा शुक्ल, बॉबी रमाकांत व संदीप पाण्डेय कोरोना वायरस से उपजी ‘कोविड-19’ बीमारी ने बेहद छोटे, करीब तीन महीने के अंतराल में कई तरह के गुल खिलाए हैं। सरकारी लापरवाही, अक्षमता और टालू प्रवृत्ति उन कईयों में से…

वैक्सीन के निर्माण में जरूरी है आत्म-निर्भरता

‘कोविड-19’ के इलाज के लिए वैक्‍सीन यानि ‘टीका’ की अहमियत उजागर हुई है, लेकिन क्‍या विशाल पैमाने पर इसका निर्माण आसान होगा? वे कंपनियां जो धंधे की खातिर झूठे आंकडों से बीमारी की गंभीरता स्‍थापित करने से लगाकर खुद बीमारी…

कोरोना संकट पर सामान्‍य ज्ञान

कोरोना वायरस ने इन दिनों दुनियाभर में खलबली मचा दी है। अमीर-गरीब, ऊंचा-नीचा, काला-गोरा, गरज कि हर नस्‍ल और फितरत के इंसान को कोरोना ने अपनी चपेट में ले लिया है। इससे कैसे निपटा जाए? यह सभी को बार-बार बताया…

पत्थरों की रिसती धूल से साँसों में जमती मौत

सिलिकोसिस एक लाईलाज बीमारी है और जब एक बार व्यक्ति का प्रमाणीकरण हो गया है कि वह सिलिकोसिस का ही मरीज है, तो फिर इसके क्या मायने हैं ? राज्‍य सरकार व्‍दारा अभी किये जा रहे सारे जतन केवल फटे…

जरूरत है गरीबजनों के लिए सस्ती दवाईयों की

बाजार प्रोत्साहन में अरुचि के परिणाम स्वरूप बीमारियों के अनुसंधान में भारी कमी और असमानता है, जिसका सबसे ज्यादा खामियाजा समाज की उपेक्षित आबादी को ही उठाना पड़ता है। दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रीय स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक और संयुक्त राष्ट्र…