नई दिल्ली, 23 सितंबर। एक ऐसे दौर में जब दुनिया हिंसा, असमानता और पर्यावरण संकट से जूझ रही है, गांधी के विचार फिर से उम्मीद और प्रकाश का स्रोत बनकर सामने आए हैं। इसी दृष्टि से 22 सितंबर, 2025 को…
आशा पटेल जापान। गांधी शांति प्रतिनिधिमंडल जापान के माउंट फ़ूजी के समीप स्थित शिनफ़ूजी रेलवे स्टेशन पहुँचा, जहाँ प्रतिनिधिमंडल का स्वागत सुश्री युका सायोनजी ने किया। वे जापान के पूर्व प्रधानमंत्री प्रिंस सायोनजी किनमोची की परनातिन तथा GOI पीस फाउंडेशन…
एक संस्मरण: बयालीस साल पहले हाल ही में 29 अगस्त को “गांधी” फिल्म के निर्देशक एटनबरो की पुण्यतिथि थी। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर उन्हें याद करते हुए “गांधी” फिल्म की श्रेष्ठता का वर्णन किया है। तानाशाही के विरोध…
ग्रामीण प्रौद्योगिकी के पुरोधा देवेंद्र भाई गुप्ता की जन्मशताब्दी वर्ष पर दिल्ली में राष्ट्रीय संगोष्ठी सम्पन्न कुमार सिद्धार्थ की रिपोर्ट नई दिल्ली,31 अगस्त। ‘डॉ. देवेन्द्र कुमार गुप्ता जमीन से जुड़े सच्चे गांधीवादी वैज्ञानिक थे। जिनसे हमेशा प्रेरणा मिलती रहती थी…
भोपाल के गांधी भवन में राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर विचार गोष्ठी का आयेाजन भोपाल, 8 अगस्त। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर विचार गोष्ठी में मुख्य अतिथि के तौर पर बात रखते हुए केंद्रीय गांधी स्मारक निधि के मंत्री एवं गांधी भवन…
महात्मा गांधी कहा करते थे कि यदि ‘आंख के बदले आंख निकाली जाए तो अंत में समूची दुनिया अन्धी हो जाएगी।’ कौन जानता था कि गांधी की विदाई के 77 साल बाद यह बात कहावत से निकलकर कड़वी सच्चाई में…
हम चाहें या ना चाहें, इंसानियत को बचाए रखने के लिए अहिंसक, लोकतांत्रिक और मानवीय प्रयासों की ही जरूरत पड़ती है। ये प्रयास सामूहिक हों तो और बेहतर। ऐसे प्रयासों को कारगर बनाने के लिए उन्हें लगातार याद करते रहना…
तिरुवनंतपुरम के निकट नेय्याटिंकारा में होगा सम्मान समारोह तिरुवनंतपुरम, 5 जुलाई। वरिष्ठ गांधीवादी विचारक, लेखक एवं केंद्रीय गांधी स्मारक निधि के अध्यक्ष श्री रामचंद्र राही को दूसरे ‘पी. गोपीनाथन नायर पुरस्कार’ से सम्मानित किया जाएगा। इस पुरस्कार के अंतर्गत ₹50,000…
पर्यावरण का जो संकट अब ठेठ हमारी देहरी तक पहुंच गया है और जिसे लेकर सालाना कर्मकांड की तरह कई दिवस भी मना लेते हैं, क्या वह हमारे ही जीवन-यापन के धतकरमों का नतीजा नहीं है? मसलन, दिनों-दिन बढ़ता-फैलता कचरे…
दूसरे विश्वयुद्ध के बाद जब अमीर ‘मित्र-राष्ट्र’ दुनिया का हिस्सा-बांटा कर रहे थे, भारत में महात्मा गांधी शांतिपूर्ण, अहिंसक और दोस्ताना दुनिया के भविष्य की जुगत बिठा रहे थे। क्या 80-85 साल पहले दुनिया के सत्ताधारियों, खासकर पश्चिम एशिया के…