गांधी दर्शन और विचार

समाज : गरीबी उन्मूलन से समाज में शांति

गरीबी और शांति के बीच गहरा और एक-दूसरे पर निर्भरता का द्वंद्वात्मक रिश्ता रहा है। यानि यदि किसी समाज में गरीबी होगी तो वहां शांति स्थापना असंभव है। पडौसी बांग्लादेश में करीब चालीस साल पहले इसे एक प्रोफेसर ने महसूस…

गांधीजी के मूल्यों को आमजन तक पहुंचाने के लिए सेवाग्राम से साबरमती आश्रम यात्रा 17 से 24 अक्टूबर 2021 तक

गांधी जी की विरासत को बचाने का एक प्रयास देश के जानी मानी कई गांधी संस्‍थाओं ने संयुक्‍त रूप से  तय किया है कि 17 से 24 अक्टूबर 2021 तक गांधीजी के सिद्धांतों और मूल्यों को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक…

मौजूदा राजनीति से असहमत गांधी

स्वराज के लिए गांधीजी राजनीतिक आजादी के साथ-साथ सामाजिक, नैतिक और आर्थिक आजादी आवश्यक मानते थे। लोकशाही की स्थापना के लिए सैनिक सत्ता पर नागरिक सत्ता की प्रधानता की लड़ाई वे अनिवार्य मानते थे। दरअसल आज सत्ता का आधार दंड…

अहिंसक निर्भयता का कैसा स्वर्णिम संदेश दुनिया को मिला

एस.एन सुब्बराव महात्मा गांधी को ऐसे जियें अमेरिका के चुने अच्छे लोग भारत में राजदूत बनकर आए। उनमें से एक बुद्धिजीवी थे – चेस्टर बौल्स। जिन्होंने भारत को लेकर एक सुंदर किताब लिखी,  उनकी बेटी ने भी एक किताब लिखी।…

प्रतिमा और पूजा-पाठ तक सीमित गांधी

हमारे समाज की चालाकी है कि वह अपना मार्ग-दर्शन और समीक्षा करने वालों का,भगवानजी से लगाकर महापुरुष तक के दर्जे का महिमामंडन करके, किनारे कर देता है। अपने जीवन को अपना संदेश बताने वाले महात्मा गांधी भी इस कारनामे की…

महात्मा गांधी बूढ़े होते दिख रहे हैं या जवान?

महात्मा गांधी अपनी मृत्यु के बाद और भी युवा होते जा रहे हैं। युवा अवस्था महज शरीर में तेजी से दौड़ने वाले हार्मोन को नहीं कहते। वह विचारों का ऐसा केमिकल लोचा है जो खत्म होने का नाम ही नहीं…

समस्याओं के हल के लिए ‘हिन्द स्वराज’

अपने समाज, देश और दुनिया के मौजूदा संकटों के निवारण के लिए महात्मा गांधी से पूछा जाता तो वे संभवत: इंग्लेंड और दक्षिण-अफ्रीका के बीच की जहाज-यात्रा के दौरान करीब 112 साल पहले लिखी अपनी किताब ‘हिन्द स्वराज’ के पन्ने…

साबरमती आश्रम : ‘वर्ल्ड-क्लास’ बनाने की सरकारी जुगत

करीब 13 लंबे सालों तक महात्मा गांधी के घर की हैसियत का ‘साबरमती आश्रम’ पिछले दो साल से सरकार के पर्यटन उद्योग की निगाहों में चढ गया है। नतीजे में गांधी की सादगी, शुचिता और किफायत के मूल्यों को ठेंगे…

आजादी के 75 साल बाद भी जल, जंगल, जमीन का प्रश्‍न नहीं हो सका हल : राजगोपाल

भारत सहित लंदन, मैक्सिको, सेनेगल, फिलीपींस एवं 25 अन्‍य देशों में चल रही है न्याय और शान्ति पदयात्रा 28 सितम्बर, 2021 दिल्ली। एक तरफ जहां हम भारत की 75वीं आजादी वर्षगाँठ का जश्न मना रहे हैं वहीं दूसरी तरफ आज…

गांधी की रचनात्मक विरासत संभालने वाले विनोबा

महात्मा गांधी की रचनात्मक विरासत को संभालने वाले विनोबा भावे अपनी किन मान्यताओं और उन पर आधारित कैसे व्यवहार की वजह से जाने-पहचाने जाते हैं? और एक आम व्यक्ति की हैसियत से इसे कैसे समझा जा सकता है? प्रस्तुत है,…