शख्सियत

सुब्बरावजी शिक्षक की तरह हैं, हम उनकी जीवनशैली देखकर कुछ सीख सकते हैं

डॉ. एस. एन. सुब्बराव पर केन्द्रित वेबीनार श्रृंखला में राजगोपाल पीवी मौजूदा दौर में कुछ लोगों में से भाई जी यानी डॉ. एस. एन. सुब्बराव एक हैं, जिन्होंने गांधीजी को देखा और उनके आंदोलन में भाग लिया। भाई जी ने…

‘घसयारियों’ को मान दिलाने वाले त्रेपन नहीं रहे

कुछ दिन पहले उत्‍तराखंड के ख्‍यात सामाजिक कार्यकर्ता त्रेपन सिंह चौहान हमसे सदा के लिए विदा हुए हैं। प्रस्‍तुत है, उनके साथी रहे सुरेश भाई के ये संस्‍मरण। हिमालय पर्वत की तरह अपने ही स्थान पर अडिग रहने वाले त्रेपन…

हरिशंकर अग्रवाल : प्रगतिशील और प्रतिबद्ध लेखन के अथक यात्री

स्‍मृति शेष पिपरिया जैसे छोटे से कस्बे से आकंठ जैसी साहित्यिक पत्रिका का निरन्तर 48 वर्षों तक सम्पादन और प्रकाशन करने वाले जाने माने प्रगतिशील कवि हरिशंकर अग्रवाल का 18 अगस्त 2020 को देहांत हो गया l हम  बचपन से उन्हें…

उस्‍ताद अमीर खान साहेब का वह राज : जैसे उनके कंधे से कोई तानपूरा बजा रहा हो

उस्ताद अमीर खां एक ऐसा नाम हैं, जिन्होंने गायकी में एक नया आयाम स्थापित करते हुए संगीत की दुनिया को इंदौर घराने की देन दी। 15 अगस्त को खान साहेब का 109 वां जन्म दिन था। अमीर खान साहेब के…

पंडित जसराज : लाल गोपाल गुलाल हमारी आँखन में झिन डारो जू

शास्त्रीय संगीत के प्रसिद्ध गायक पंडित जसराज अब इस दुनिया में नहीं रहे है। मेवाती घराने के पंडित जसराज का 17 अगस्‍त को अमेरिका के न्यू जर्सी में अपनी अंतिम सांस ली । वे 90 साल के थे। अपने 80…

अलविदा इलीना सेन, तुम हमेशा हमारे दिल में रहोगी

स्‍मृति शेष जानी-मानी सामाजिक कार्यकर्ता और लेखिका इलीना सेन का कलकत्‍ता में निधन हो गया। कैंसर से लंबी लड़ाई के बाद 69 वर्ष की आयु में रविवार को उनका निधन हो गया। एक कार्यकर्ता के रूप में उन्होंने और उनके…

जी. डी. अग्रवाल के बलिदान को कैसे स्मरण करेगें?

जन्म दिवस (20 जुलाई) स्मरण प्रसंग प्रोफेसर जी डी अग्रवाल गंगा को अविरल और निर्मल बनाने के लिए प्रतिबद्ध संत थे. उन्हें स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद के नाम से भी जाना जाता था. आईआईटी का यह एक प्रोफेसर था, जिसे…

आपके पास जो है, वह औरों से अच्छा है, अधिक पाने की इच्छा नहीं रखनी चाहिए

किशन पटनायक के किस्से  पत्नी वाणी की जुबानी  डॉ.  सुनीलम  किशन पटनायक भारत के प्रमुख समाजवादी चिन्तक और कर्मी रहे हैं। भारतीय राजनीति में जनांदोलनों की बढ़ती भूमिका को उन्होंने बहुत पहले पहचाना, समझा, उनसे एक रिश्ता बनाया और उन्हें…

सत्यजीत रे : ‘जलसाघर-द म्यूजिक रूम’

कोठी बिल्कुल जर्जर अवस्था में पहुँच चुकी है। सामने खड़े होने पर लगता है कि अपने ही ऊपर गिर पड़ेगी। यहाँ मियाँ बशीरुद्दीन से भेंट होती है। बुजुर्ग हैं। शूटिंग के दिनों के गवाह हैं। कोई महीने भर चली थी।…

अद्भुत फिल्मकार सत्यजीत रे का सिनेमाई संसार

दिनेश चौधरी दीगर चीजों के अलावा कोलकाता मुझे इसलिए भी अपनी ओर खींचता रहा कि यहाँ सत्यजीत रे रहा करते थे। कोलकाता अपने किस्म का अद्भुत शहर है और सत्यजीत रे अपने किस्म के अद्भुत फिल्मकार थे। किस्से- कहानियों की…