शख्सियत

डॉ. सुरेश मिश्र : ऊर्जा का एक और स्रोत चला गया

वरिष्ठ इतिहासकार डॉ. सुरेश मिश्र का गुरूवार (22 अप्रैल) की सुबह भोपाल में निधन हो गया । वे 84 वर्ष के थे। मध्यप्रदेश के इतिहास पर उन्होंने कई पुस्तकों का लेखन और अनुवाद किया। उदयपुर की ऐतिहासिक इमारतों के संरक्षण…

बिहारी लाल : मौन सेवक व कर्मयोगी की तरह निभाते रहे भूमिका

स्‍मृति शेष : श्रध्‍दांजलि महात्मा गांधी, विनोबा भावे एवं जयप्रकाश नारायण के विचारों को आत्मसात करने वाले समाजसेवी एवं सर्वोदयी नेता बिहारी लाल नागवाण ने गांधीवादी परंपरा को आगे बढ़ाने के साथ समाज में व्याप्त कुरूतियों को उखाड़ फेंकने के…

डॉ. भीमराव अंबेडकर- बहुजनों के मसीहा

14 अप्रैल – डॉ. भीमराव अंबेडकर की130वीं जयंती पर विशेष स्वतंत्रता, समानता, भाईचारा, बौद्ध धर्म, विज्ञानवाद, मानवतावाद, सत्य, अहिंसा आदि के विषय अम्बेडकरवाद के सिद्धान्त हैं। दलितों में सामाजिक सुधार, भारत में बौद्ध धर्म का प्रचार एवं प्रचार, भारतीय संविधान…

वैज्ञानिक प्रयोगों और सिद्धांतों को सरल भाषा में समझाते थे कालूराम शर्मा

इंदौर (सप्रेस) । प्रख्यात प्रकृति शोधक, विज्ञान लेखक व वनस्पति शास्त्री और शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय कालूराम शर्मा का 10 अप्रैल की दोपहर को निधन हो गया। वे 59 वर्ष के थे। उन्‍होंने पिछले दिनों ही कोरोना वैक्‍सीन लगवाई…

अरविंद ओझा : मरुस्थल की धरती में उम्मीद के बीज बोए

अरविंद ओझा का जीवन सरल, सहज व सादगीपूर्ण था। वे जमीनी सामाजिक कार्यकर्ता तो थे ही पर उनकी पठन-पाठन में गहरी रूचि थी। उन्हें यहां गुरूजी के नाम से जाना जाता था। वे कहानीकार व कवि भी थे। वे बहुत…

पद्मश्री भूरीबाई और ‘चित्तरकाज’

गणतंत्र दिवस पर इस साल लोक-कलाकार श्रीमती भूरी बाई को पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। कोई पचास साल पहले ‘लिखमा जोखारी’ ने भूरीबाई के नाम के आगे ‘चित्तरकाज’ लिखा था जिसे भूरीबाई दिनों-दिन बढ़ती लगन से करती जा रही…

ग़ज़ल सुनते हों तो मधुरानी को सुनें

मधुरानी की गायकी के मुरीद लोगों की सूची बहुत लंबी है। इंदिरा गांधी और डॉ जाकिर हुसैन इन्हें खूब सुनते थे। उनके एलबम ‘इंतज़ार’ में दिलीप कुमार ने अपनी आवाज दी है। मुम्बई में जब इसकी रिकॉर्डिंग चल रही थी,…

महेंद्र भाई : कहाँ गए वे लोग, सही के प्रति आग्रह ही जिनका धर्म रहा है

सप्रेस के संस्‍थापक संपादक : महेंद्र कुमार 18 वां पुण्‍य स्‍मरण सप्रेस संस्थापक संपादक, वरिष्ठ गांधीवादी चिंतक, सर्वोदयी सिद्धान्त के पोषक, वैकल्पिक विकास के एवं कार्यकर्ताओं के हितैषी, जन आन्दोलनों के समर्थक, रचनात्मक पत्रकारिता के सशक्त हस्ताक्षर महेंद्रकुमार जी ने…

अनुपम मिश्र : पहली मुलाकात और चिपको आंदोलन

सतत विश्वसनीयता खोते मीडिया के इस जमाने में यह जानना दिलचस्प हो सकता है कि वन-संरक्षण के ‘चिपको आंदोलन’ को उन दिनों की ख्यात साप्ताहिक पत्रिका ‘दिनमान’ और उसके अनुपम मिश्र जैसे लेखक क्या और कैसी ऊर्जा देते थे। प्रस्तुत…

मंगलेश डबराल : कविता और गद्य में अलग से पहचानी जाती लालटेन की रोशनी बुझ गई

जनवादी कवि मंगेलश डबराल हमेशा हमारे बीच में रहेंगे प्रस्‍तुति : कुमार सिध्‍दार्थ 9 दिसंबर । वरिष्ठ कवि-लेखक और पत्रकार मंगलेश डबराल का हमारे बीच न रहना साहित्यिक और पत्रकारिता जगत की बडी क्षति है। मंगलेश डबराल समकालीन हिंदी कवियों…