महेंद्र भाई : कहाँ गए वे लोग, सही के प्रति आग्रह ही जिनका धर्म रहा है
सप्रेस के संस्थापक संपादक : महेंद्र कुमार 18 वां पुण्य स्मरण सप्रेस संस्थापक संपादक, वरिष्ठ गांधीवादी चिंतक, सर्वोदयी सिद्धान्त के पोषक, वैकल्पिक विकास के एवं कार्यकर्ताओं के हितैषी, जन आन्दोलनों के समर्थक, रचनात्मक पत्रकारिता के सशक्त हस्ताक्षर महेंद्रकुमार जी ने…
अनुपम मिश्र : पहली मुलाकात और चिपको आंदोलन
सतत विश्वसनीयता खोते मीडिया के इस जमाने में यह जानना दिलचस्प हो सकता है कि वन-संरक्षण के ‘चिपको आंदोलन’ को उन दिनों की ख्यात साप्ताहिक पत्रिका ‘दिनमान’ और उसके अनुपम मिश्र जैसे लेखक क्या और कैसी ऊर्जा देते थे। प्रस्तुत…
मंगलेश डबराल : कविता और गद्य में अलग से पहचानी जाती लालटेन की रोशनी बुझ गई
जनवादी कवि मंगेलश डबराल हमेशा हमारे बीच में रहेंगे प्रस्तुति : कुमार सिध्दार्थ 9 दिसंबर । वरिष्ठ कवि-लेखक और पत्रकार मंगलेश डबराल का हमारे बीच न रहना साहित्यिक और पत्रकारिता जगत की बडी क्षति है। मंगलेश डबराल समकालीन हिंदी कवियों…
महात्मा को मैदान में उतारने वाले – विनोबा
ध्यान से देखें तो आजादी के बाद से ही गांधी और उनके बाद विनोबा ने लगातार हमारे विकास की बातें की हैं। ये बातें सम-सामयिक सत्ता-प्रतिष्ठानों को कभी नहीं सुहाई और नतीजे में अब हम विकास को विनाश की संज्ञा…
विनोबा का जीवन-दर्शन : यज्ञ-दान-तप की साधना
विनोबा भावे गांधीजी की परंपरा में आते हैं। विनोबाजी का जीवन अपने आप में त्याग और तपस्या की प्रतिमूर्ति था। उनके ’भूदान आंदोलन’ ने देश के हजारों लोगों को भूमि दिलाकर जीने का साधन उपलब्ध कराया। एक व्यक्ति से संपत्ति…
अब उनकी स्मृतियाँ और कला ही हमारे बीच है
चित्रकार, लेखक दिलीप चिंचालकर का पार्थिव शरीर पंचतत्व में लीन 14 नवंबर। एक मौन चित्रकार, पत्रकार, जिंदगी के कैनवास को खूबसूरत रंगों से सजाने संवारने वाले, प्रकृति सेवक और अपनी मौज में जीने वाले दिलीप चिंचालकर का पार्थिव शरीर आज…
पत्रकारिता की प्रभाष परंपरा की प्रासंगिकता
4 नवंबर : पुण्य तिथि पर विशेष प्रभाष जोशी की परंपरा सिर्फ लोकभाषा में एक अच्छा अखबार निकालने की ही नहीं है। वे एक उच्च कोटि के कम्युनिकेटर हैं और अपने समाज के हितैषी और चिंतक। विवादों के बावजूद उनकी…
जिनके बिना आज का भारत न होता
31 अक्टूबर : सरदार पटेल की 145वीं जयंती भारत छोड़ो आंदोलन में अनेक राष्ट्रभक्तों ने अपने अपने ढंग से इस पवित्र यज्ञ में अपनी आहुति दी थी। इनमें सरदार वल्लभभाई पटेल ऐसा नाम है,जिसने गोरी हुक़ूमत को अपने तेवरों से…
कपिला बहन : हमसे तब बिछुड़ी जब उनकी जरुरत ज्यादा है
नर्मदा बचाओ आंदोलन की जुझारु कार्यकर्ता कपिला बहन नहीं रही। उनका निधन 26 अक्टूबर 2020 को हो गया। सरदार सरोवर बाँध की केवड़िया कॉलोनी निर्माण से किए गए विस्थापन के खिलाफ वे अंतिम दम तक लड़ती रही जिसमें उनके परिवार…
उनके लिए गांधी और भगत सिंह में भेद नहीं था
गणेश शंकर विद्यार्थी की जयंती पर विशेष गणेश शंकर विद्यार्थी का जन्म 26 अक्तूबर 1890 को अपनी नानी गंगा देवी के घर अतरसुरैया इलाहाबाद (प्रयागराज) में हुआ था। उनका नाम उनकी नानी ने पहले ही चुन लिया था जब उन्होंने…









