शख्सियत

जेपी का इस्तेमाल छोड़ें, उन्हें समझने की कोशिश करें

जेपी की संपूर्ण क्रांति के मूल में स्वतंत्रता समता और बंधुत्व की ही अवधारणा है। उन्होंने उसे भारतीय संदर्भ और अपने अंतरराष्ट्रीय अनुभवों से नया रूप दिया था। वे अपनी नैतिकता में हमारी पतित होती राजनीतिक व्यवस्था का शुद्धीकरण करना…

जेपी आज होते तो कितने लोग उनका साथ देते ?

लोक नायक जयप्रकाश नारायण : 8 अक्‍टूबर पुण्‍य स्‍मरण लोक नायक जयप्रकाश नारायण (जेपी) की आज (8 अक्‍टूबर) पुण्यतिथि है और तीन दिन बाद ग्यारह अक्टूबर को उनकी जयंती । जेपी को सबसे पहले राजगीर(बिहार) में 1967 के सर्वोदय सम्मेलन…

नई राजनीति के नेता – शंकर गुहा नियोगी

शंकर गुहा नियोगी : 28 सितंबर पुण्‍य स्‍मरण सत्तर के दशक में पहले ‘छत्तीसगढ़ माइन्स श्रमिक संघ’ (सीएमएसएस) और फिर ‘छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा’ (सीएमएम) का गठन करके मजदूरों, किसानों में एक नई राजनीतिक चेतना विकसित करने वाले कॉमरेड शंकर गुहा…

93 साल के आजन्म युवा आंदोलनकारी थे जगन्नाथ काका !

स्‍मृति शेष : श्रध्‍दांजलि जगन्नाथ काका नहीं रहे| नर्मदा घाटी का एक और सितारा बुझ गया | सालों से वृध्दत्व को नकारते, कई बार गिरते, फ्रेकचर लेकर भी दौड़ते काका शांत हो गये| उनकी जीवनज्योत हमारे लिए जलती रहेगी जरुर…

स्वामी अग्निवेश : बेबाक, प्रखर, निर्भीक व्यक्तित्व को अंतिम सलाम

स्‍मृति शेष : श्रध्‍दांजलि न्याय, समता, बराबरी और जन समर्थक के पक्षधर रहे स्वामी अग्निवेश के अवसान से एक निरपेक्ष व्यक्तित्व का मौन हो जाना है। वे प्रखरता र्और मुखरता से कई मुददों पर अपने विचार रखते थे। वे बंधुआ…

अहिंसक समाज रचना के लिये जरूरी है, मालिकी विसर्जन

विनोबा के विचार, उन्‍हीं के शब्दों में 11 सितंबर विनोबा भावे की 125 वां जयन्ती वर्ष एक व्‍यक्ति, समाज, देश और दुनिया की हैसियत से हम आज जहां पहुंचे हैं, वह कोई ‘टिकने,’ यहां तक कि ‘गुजरने’ के लिहाज से भी…

हर दिन नयी ज़मीन, हर दिन नया आसमान

11 सितंबर विनोबा भावे की 125 वां जयन्ती वर्ष महात्‍मा गांधी के आध्यात्मिक अनुयायी माने जाने वाले विनोबा अपने विचारों और उन विचारों के क्रियान्‍वयन में अनूठे थे। विडम्बना यह है कि सन्त, महात्‍मा और ईश्‍वर के दर्जे पर रखने…

सुब्बरावजी शिक्षक की तरह हैं, हम उनकी जीवनशैली देखकर कुछ सीख सकते हैं

डॉ. एस. एन. सुब्बराव पर केन्द्रित वेबीनार श्रृंखला में राजगोपाल पीवी मौजूदा दौर में कुछ लोगों में से भाई जी यानी डॉ. एस. एन. सुब्बराव एक हैं, जिन्होंने गांधीजी को देखा और उनके आंदोलन में भाग लिया। भाई जी ने…

‘घसयारियों’ को मान दिलाने वाले त्रेपन नहीं रहे

कुछ दिन पहले उत्‍तराखंड के ख्‍यात सामाजिक कार्यकर्ता त्रेपन सिंह चौहान हमसे सदा के लिए विदा हुए हैं। प्रस्‍तुत है, उनके साथी रहे सुरेश भाई के ये संस्‍मरण। हिमालय पर्वत की तरह अपने ही स्थान पर अडिग रहने वाले त्रेपन…

हरिशंकर अग्रवाल : प्रगतिशील और प्रतिबद्ध लेखन के अथक यात्री

स्‍मृति शेष पिपरिया जैसे छोटे से कस्बे से आकंठ जैसी साहित्यिक पत्रिका का निरन्तर 48 वर्षों तक सम्पादन और प्रकाशन करने वाले जाने माने प्रगतिशील कवि हरिशंकर अग्रवाल का 18 अगस्त 2020 को देहांत हो गया l हम  बचपन से उन्हें…