दंगों के बीच खरगोन में नए कैराना की तलाश ?
तमाम लोग जो खरगोन से उठ रहे धुएँ के अलग-अलग रंगों का दूर से अध्ययन कर रहे हैं उन्हें एक नया मध्य प्रदेश आकार लेता नज़र आ रहा है। एक ऐसा मध्य प्रदेश जिसकी अब तक की जानी-पहचानी भाषा और…
राजेंद्र माथुर को याद करना ज़रूरी हो गया है!
पुण्य स्मरण : नौ अप्रैल पत्रकारिता जब वैचारिक रूप से अपनी विपन्नता के सबसे खराब दौर से गुज़र रही हो ,संवाद-वाहकों ने खबरों के सरकारी स्टॉक एक्सचेंजों के लायसेन्सी दलालों के तौर पर मैदान सम्भाल लिए हों, मीडिया पर सेंसरशिप…
ये विभाजन की विभीषिका के ‘क्लाशनिकोव’ क्षण हैं !
डर अब ‘द कश्मीर फ़ाइल्स’ देखने को लेकर नहीं बल्कि इस बात पर सोचने से ज़्यादा लग रहा है कि अब अगर विभाजन की ‘वास्तविकता’ पर फ़िल्में बनाईं गईं तो वे कैसी होंगी? क्या विभाजन की त्रासदी पर ( ‘तमस’…
हिजाब तो एक बहाना है ! निशाने पर कुछ और है ?
सवाल अब बुर्के या हिजाब के पहनने या नहीं पहनने का ही नहीं बल्कि यह भी बन गया है कि क्या एक विचारधारा विशेष के प्रति प्रतिबद्ध उत्तेजक भीड़ ही यह तय करने वाली है कि किसे क्या पहनना या…
जनता के ‘बजट’से जनता की ही जासूसी ?प्रजातंत्र अमर रहे !
अत्याधुनिक उपकरणों की मदद से उस सरकार द्वारा अपने ही उन नागरिकों की जासूसी करना जिसे कि उन्होंने पूरे विश्वास के साथ अपनी रक्षा की ज़िम्मेदारी सौंप रखी है एक ख़तरनाक क़िस्म का ख़ौफ़ उत्पन्न करता है। ख़ौफ़ यह कि…
गांधी का ख़ौफ़ है कि उन्हें ख़त्म करने की बार-बार कोशिशें होतीं हैं !
राष्ट्रपिता की छवि और उनके विचारों की हत्या करने के योजनाबद्ध प्रयासों, बापू के द्वारा स्थापित आश्रमों के आधुनिकीकरण के नाम पर किए जा रहे विनाश और गांधी को समाप्त करने के षड्यंत्रों के प्रति सत्ता के शिखरों का रहस्यमय…
प्रधानमंत्री सुरक्षा व्यवस्था : बठिंडा से उठा बवाल बवंडर नहीं बन पाया !
प्रधानमंत्री के क़द के व्यक्ति की सुरक्षा व्यवस्था में जो चूक हुई है वह चिंताजनक है। इस तरह की चूकों का असली ख़ामियाज़ा भी अफ़सरों को ही भुगतना पड़ता है। ममता बनर्जी और चरणजीत सिंह चन्नी में जितना फ़र्क़ है…
क्या देश में ‘गृह युद्ध’ को आमंत्रित किया जा रहा है ?
धर्म संसद जैसे आयोजनों से उठने वाली आवाज़ें मोदी के नेतृत्व वाले भारत की छवि को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तो क्षति पहुँचा ही रही है, देश के भीतर भी भाजपा की ताक़त को कमजोर कर रही है। योगी के कट्टर…
जुगनू जहां भी रहे ,उजाला ही फैलाते रहे
श्रद्धांजलि बिहार के जाने-माने पत्रकार जुगनू शारदेय का 15 दिसंबर को दिल्ली के एक वृद्धाश्रम में निधन हो गया। वह निमोनिया से ग्रस्त हो गए थे और उन्हें वृद्धाश्रम की गढ़मुक्तेश्वर स्थित शाखा से दिल्ली लाया गया था। पिछले कुछ…
लॉक डाउन के 233वें दिन के बाद की पहली दिवाली!
हम एक बार फिर दीपावली से रूबरू हैं। हमारे भीतर का लॉक डाउन अभी भी जारी है। ’न्यूयॉर्क टाइम्स’ की एक रिपोर्ट पर यक़ीन करना हो तो भारत में (सरकारी दावे 4.58 लाख के मुक़ाबले) कोरोना के मृतकों की कुल…









