श्रवण गर्ग

गांधी पुण्‍य स्‍मरण : कोई अदृश्य ताक़त ही गांधी को मरने से बचा रही है ?

गांधी की हत्या के बाद फाँसी तक के 655 दिनों में नाथूराम गोडसे इस भ्रम में जीता रहा कि उसने गांधी के साथ उनके विचारों को भी हमेशा के लिए समाप्त कर दिया है। लेकिन इतिहास ने साबित किया कि…

राम को तो रोज़ अपने घर लौटना चाहिए !

हम हर दीपावली पर राम की प्रतीक्षा करते हैं, पर अपनी अयोध्या में लौटने का साहस नहीं जुटा पाते। असली दीपावली तब होगी जब हम अपने भीतर के वनवास से लौटें, भय से नहीं, विश्वास से दीया जलाएँ — ताकि…

मोदी ट्रम्प से डरते हैं या नहीं ? संकेत तो ऐसे ही नज़र आते हैं ?

राहुल गांधी के इस आरोप कि मोदी राष्ट्रपति ट्रम्प से ख़ौफ़ खाते हैं, पर अप्रत्याशित प्रतिक्रिया अमेरिकी गायिका मेरी मिलबेन ने दी है। मोदी समर्थक मानी जाने वाली मिलबेन ने कहा कि पीएम की ट्रम्प के प्रति रणनीति डर नहीं,…

ट्रम्प और नोबेल पुरस्कार : शांति के मायने बदलने का दौर?

नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा के बाद एक बार फिर यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या यह सम्मान “शांति” के लिए है या “राजनीति” के लिए। ट्रम्प को उम्मीद थी कि गाज़ा युद्धविराम में उनकी भूमिका के चलते…

विचार : क्या गवई के ‘धैर्य’ से सत्ता के सिंहासनों की चूलें हिल गईं ?

न्यायमूर्ति भूषण रामकृष्ण गवई ने 6 अक्‍टूबर के उस अपमानजनक क्षण में जिस असाधारण धैर्य का परिचय दिया, उसने न केवल न्यायपालिका की गरिमा की रक्षा की, बल्कि सत्ता और समाज दोनों को गहरे आत्ममंथन के लिए विवश कर दिया।…

हमारा बूढ़ा होता नेतृत्व कितना बीमार है कैसे पता चलेगा ?

देश की युवा आबादी के उलट, सत्ता पर क़ाबिज़ बुज़ुर्ग नेतृत्व न केवल औसतन बीमारियों की चपेट में है, बल्कि उनकी असल स्वास्थ्य स्थिति लौह सुरक्षा और चुप्पी के पर्दे में छिपी रहती है। क्या एक बीमार नेतृत्व एक संकटग्रस्त…

संघमित्रा  गाडेकर : जगहें तेज़ी से ख़ाली हो रही हैं, भर जरा भी नहीं रहीं !

संघमित्रा गाडेकर (उमा जी) की चुपचाप हुई विदाई के साथ जैसे एक युग भी विदा हो गया—राजघाट की स्मृतियाँ, सर्वोदय शिविरों की ऊष्मा और खादी में लिपटी उनकी शांत उपस्थिति अब स्मरण में रह गई हैं। वे एक चिकित्सक से…

पुलवामा के सवाल अनुत्तरित हैं ! बैसरन के जवाब मिलेंगे क्या ?

बैसरन घाटी में पर्यटकों पर हुआ आतंकी हमला देश को झकझोर गया है। सरकार ग़ुस्से में है और कड़ी कार्रवाई के संकेत दे रही है। हमले में 26 लोगों की जान गई। जवाबी कार्रवाई की बातों के बीच सवाल यह…

विनोद कुमार शुक्ल : ‘इतनी उदासीनता कहाँ से आती है ?’

ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता विनोद कुमार शुक्ल के साहित्य में सामाजिक-राजनीतिक संघर्षों की अनुपस्थिति को लेकर बहस छिड़ी है। यह बहस साहित्यकार की सामाजिक जिम्मेदारी और उसकी व्यक्तिगत रचनात्मक स्वतंत्रता के बीच संतुलन का सवाल उठाती है। सवाल है क्या हर…

Sunita Williams Return : किसी चमत्कार से कम नहीं है अंतरिक्ष से धरती पर यह वापसी !

अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स 286 दिनों बाद धरती पर लौट आई हैं। वे केवल आठ दिनों के लिए अंतरिक्ष गई थीं, लेकिन तकनीकी दिक्कतों के कारण उनकी वापसी टलती रही। उनकी सुरक्षित वापसी ने दुनिया को राहत की सांस लेने…