डॉ. ओ.पी. जोशी

चिपको आंदोलन की 50 वीं वर्षगांठ : देश में वनों के संरक्षण के लिए फिर इसकी जरूरत

चिपको आंदोलन का इतना प्रभाव हुआ कि मई 1974 में राज्य सरकार ने डा. वीरेन्द्र कुमार की अध्यक्षता में एक समिति वनों के अध्ययन हेतु बनायी। समिति ने अपनी रिपोर्ट में चिपको आंदोलन के कार्यो को सही बताया। संभवतः इसी…

खगोलीय घटना : अंतरिक्ष कचरे से बढ़ता खतरा

पृथ्वी पर चौबीस घंटे उल्का पिंड गिरते रहते हैं लेकिन उनका आकार बड़ा नहीं होता। पिछले सप्‍ताह मध्यप्रदेश के मालवा-निमाड़ में हुए मेटोर शॉवर समूह में था, जो आकाश में दिखाई दिया। उल्कापिंड पुच्छल तारे के रूप में होते है।…

विश्‍व वानिकी दिवस : जंगल की जरूरत

21 मार्च विश्‍व वानिकी दिवस जलवायु के जानकारों ने बताया कि कार्बन सोखने में जंगलों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। विश्व के जंगल कुल कार्बन उत्सर्जन का 30 प्रतिशत अवशोषण कर लेते हैं। ‘इंटरनेशनल पेनल आन क्लायमेट चेंज’ (आयपीसीसी)…

Russia-Ukraine War : पर्यावरण के लिए भी घातक है, युद्ध

असंख्य इंसानों की प्रत्यक्ष मौतों के अलावा युद्धों से पीढी-दर-पीढी चलने वाली पर्यावरण की बर्बादी भी होती है। विडंबना यह है कि यह किसी को दिखाई तक नहीं देती। इन दिनों रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में भी…

पांच राज्यों में चुनाव : खारिज होता पर्यावरण

पांच राज्यों की विधानसभाओं के आसन्न चुनावों में हमेशा की तरह वे सभी धतकरम किए जा रहे हैं जिन्हें हमारे मौजूदा तर्ज के लोकतंत्र ने आत्मसात कर लिया है, लेकिन क्या इस धमा-चौकडी में हमारे जीवन के लिए जरूरी पर्यावरणीय…

आकाश से बर्फ रूप में गिरती ‘गंदगी’

आसमान से बर्फ के गोले या सिल्लियां गिरने की घटनाएं दुनिया में कई स्थानों पर हुई है। बर्फ के गिरे गोलों या सिल्लियों का वजन 5-7 किलो से लेकर 25-30 किलो तक आंका गया है एवं रंग सफेद, नीला, हरा,…

वायु-प्रदूषण की चपेट में बच्चे

हमारे देश में वायु-प्रदूषण के साथ-साथ जल एवं शोर-प्रदूषण तथा कृषि के रसायन भी शिशुओं तथा नवजात को प्रभावित कर रहे हैं। बच्चों को कुपोषण तथा अल्पपोषण की स्थिति इन सभी प्रभावों को ज्यादा गंभीर बना देती है। कुछ प्रयासों…

पर्वों पर पटाखे

दीपावली पर विशेष पहले जिन पटाखों की पूछ-परख पर्व-त्यौहारों पर ही होती थी, आजकल उन्हें आए दिन फोडने के अवसर खोजे जाने लगे हैं। क्या हमारे समाज में इन पटाखों की अहमियत पहले भी ऐसी ही थी? क्या लंका से…

मध्यप्रदेश/उत्तरप्रदेश : कितने लाभ के लिए केन-बेतवा जोड़

बरसों से नदी-जोड़ परियोजना का सपना देखने वालों को अब देश के तीस उत्कृष्ट विद्वान पर्यावरणविदों की चुनौती मिली है। इस योजना के तहत काटे जाने वाले जंगल तथा पेड़ों से वन्य-जीवन, जैव-विविधता तथा पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव निश्चित रूप…

महाकुम्भ की तरह हर 12 वर्ष में आता है नीलकुरूंजी का दुर्लभ फूल

पेड़-पौधों में रूचि रखने वालों वनस्पति शास्त्र के शिक्षक व विद्यार्थी तथा प्रकृति सौदर्यं को निहारने वालों के लिए नीलकुरूंजी का फूलता फूल किसी महाकुम्भ से कम नहीं है। पर्यटकों को इन फूलों की खूबसूरती को देखने के लिए 12…