दीपावली पर विशेष पहले जिन पटाखों की पूछ-परख पर्व-त्यौहारों पर ही होती थी, आजकल उन्हें आए दिन फोडने के अवसर खोजे जाने लगे हैं। क्या हमारे समाज में इन पटाखों की अहमियत पहले भी ऐसी ही थी? क्या लंका से…
बरसों से नदी-जोड़ परियोजना का सपना देखने वालों को अब देश के तीस उत्कृष्ट विद्वान पर्यावरणविदों की चुनौती मिली है। इस योजना के तहत काटे जाने वाले जंगल तथा पेड़ों से वन्य-जीवन, जैव-विविधता तथा पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव निश्चित रूप…
पेड़-पौधों में रूचि रखने वालों वनस्पति शास्त्र के शिक्षक व विद्यार्थी तथा प्रकृति सौदर्यं को निहारने वालों के लिए नीलकुरूंजी का फूलता फूल किसी महाकुम्भ से कम नहीं है। पर्यटकों को इन फूलों की खूबसूरती को देखने के लिए 12…
छतरपुर जिले के बक्सवाहा में हीरे के लिए काटे जाने वाले जंगलों की कीमत आखिर क्या है? जिस तरह हीरे की कीमत उसकी कठोरता और चमक आदि के आधार पर तय की जाती है, ठीक उसी तरह पेडों की कीमत…
कोविड-19 महामारी ने हमारे आसपास अपने गंधहीन, रंगहीन स्वरूप में मौजूद तत्व ऑक्सीजन की अहमियत उजागर कर दी है। यह ऑक्सीजन या प्राणवायु प्रकृति के जिस खजाने से मिलती है, उसकी हम कितनी परवाह करते हैं? क्या हम खुद अपने…
भारत में यह मानसून का मौसम है और इसी दौर में जगह-जगह बिजली गिरने की घटनाएं होती रहती हैं। बारिश के दौरान आसमानी बिजली गिरने से देश में हर साल 3,000 से अधिक मौतें होती हैं। अभी हाल ही में…
अपने जीने के लिए जरूरी पर्यावरण के साथ हम एक व्यक्ति, समाज और सत्ता की तरह जैसा क्रूर, आत्महंता व्यवहार कर रहे हैं, वह एक सीमा के बाद हमें खुद ही भोगना पडेगा। विकास के झांसे में की जा रही…
दुनियाभर को चिपको आंदोलन के जरिये पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संदेश देने वाले हिमालय रक्षक कहे जाने वाले सुंदरलाल बहुगुणा हाल ही में दुनिया से बिदा हो गए। महात्मा गांधी के विचारों को आत्मसात करके बहुगुणाजी ने प्रकृति, पेड़, पहाड़…
प्रकृति को ‘प्रसाद’ मानने और उसी लिहाज से उसके ‘फलों’ का उपभोग करने की नैतिक, आध्यात्मिक निष्ठा के अलावा बीसवीं सदी में रचा गया हमारा संविधान भी पर्यावरण को लेकर खासा सचेत है। उसके कई हिस्से जल, जंगल, जमीन, वायु…
कहावत है कि ‘फिसल पडे की हर गंगा,’ यानि गलती से फिसल गए तो हर गंगा कहकर डुबकी मार ली और पुण्य कमा लिया। कोविड-19 के दौर में कुछ ऐसा ही हुआ है। बीमारी से बचने की खातिर देशभर में…