राजेंद्र सिंह ने कहा; नदियों का पुनर्जीवन सतत विकास और जल सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण
मुंबई, 16 सितंबर। महाराष्ट्र राज्य की नदियों के संरक्षण एवं पुनर्जीवन के लिए ’’‘महाराष्ट्र नदी संरक्षण अभियान’’’ चलाया जाएगा। अभियान का शुभारंभ प्रदेश के मुख्यमंत्री की उपस्थिति में नासिक में आयोजित सम्मेलन के माध्यम से शीघ्र किया जाएगा। इस संबंध में प्रस्ताव मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की स्वीकृति के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। आगामी कुंभ मेले के मद्देनजर नासिक में विशेष राज्यस्तरीय कार्यशाला एवं अन्य कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाएगा।
मंत्रालय में जल संसाधन मंत्री गिरीश महाजन की अध्यक्षता में नदी पुनर्जीवन के संबंध में एक बैठक आयोजित की गई। बैठक में जलवेत्ता डॉ. राजेंद्र सिंह, सचिव एकनाथ डवले, डॉ. चंद्रकांत पुलकुंडवार, सचिव (लाभक्षेत्र विकास) प्रकाश मिसाल सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी तथा जल बिरादरी के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
स्वतंत्रता के अमृत महोत्सव के अवसर पर राज्य सरकार द्वारा ’’‘चला जाणूया नदीला’’’ (आइए, नदी को जानें) अभियान चलाया गया था। इस अभियान के अंतर्गत राज्य के 35 जिलों की 108 नदियों का अध्ययन किया गया। नदियों के प्रति जनजागरूकता पैदा करने के साथ-साथ उन्हें ’’अविरल, निर्मल और प्रवाहमान’’ बनाए रखने के लिए आवश्यक उपायों का भी अध्ययन किया गया।
स्थानीय नागरिकों, विद्यार्थियों, पारंपरिक ज्ञान रखने वाले अध्येताओं, वैज्ञानिकों और प्रशासनिक अधिकारियों की सहभागिता से ’’लोक-अध्ययन एवं कार्ययोजनाएँ’’ तैयार की गई हैं। इन कार्ययोजनाओं में सुझाए गए उपायों के आधार पर जल संसाधन विभाग तथा राज्य सरकार के अन्य संबंधित विभाग आपसी समन्वय से नदी संरक्षण का कार्य करेंगे।
इस अवसर पर डॉ. राजेंद्र सिंह ने कहा कि महाराष्ट्र की नदियों का पुनर्जीवन और संरक्षण राज्य के ’’सतत विकास तथा जल सुरक्षा’’ के लिए महत्वपूर्ण विषय बन गया है। औद्योगिक प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के कारण जलस्रोतों के सूखने की स्थिति को देखते हुए उन्होंने विभिन्न स्तरों पर सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में नदियों के पुनर्जीवन के लिए किए जा रहे इन प्रयासों के क्रम में नासिक में आयोजित होने वाला कार्यक्रम महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। बैठक में जल बिरादरी के नरेंद्र चुघ, डॉ. सुमंत पांडे, अभिनेता चिन्मय उदगीरकर, महेंद्र महाजन, राजेश पंडित, मनोज साठे सहित अन्य प्रतिनिधि उपस्थित थे।
महाराष्ट्र सरकार की इस पहल का अध्ययन कर आंध्र प्रदेश में भी इसी प्रकार का नदी संरक्षण कार्यक्रम चलाने की दिशा में जल बिरादरी के राष्ट्रीय समन्वयक सत्यानारायण बोलशेट्टी ने बैठक में सहभागिता की।