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स्मृतियों से आगे होमी दाजी के जीवन मूल्यों और प्रतिबद्धता को याद करने का समय

स्मृतियों से आगे होमी दाजी के जीवन मूल्यों और प्रतिबद्धता को याद करने का समय

होमी दाजी की जन्म शताब्दी का समापन

इंदौर, 15 सितंबर। इंदौर के मजदूर आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर आवाज देने वाले ट्रेड यूनियन नेता और जननेता कामरेड होमी दाजी की जन्म शताब्दी के समापन अवसर पर विशेष आयोजन किया गया। इसमें विभिन्न ट्रेड यूनियन संगठनों, सामाजिक-सांस्कृतिक और साहित्यिक क्षेत्रों से जुड़े कार्यकर्ताओं तथा राजनीतिक-सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। वक्ताओं ने होमी दाजी के जीवन, मजदूरों के अधिकारों के लिए उनके संघर्ष और इंदौर के औद्योगिक मजदूर आंदोलन में उनकी भूमिका को याद किया।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि होमी दाजी का पूरा जीवन मजदूरों, श्रमिकों और आम जनता के अधिकारों के संघर्ष को समर्पित रहा। उन्होंने इंदौर के औद्योगिक क्षेत्र में मजदूरों की समस्याओं को उठाने के साथ उनके संघर्ष को व्यापक सामाजिक और राजनीतिक आंदोलन से जोड़ने का काम किया। वक्ताओं के अनुसार, उनके संघर्ष की गूंज इंदौर से देश के दूसरे हिस्सों तक पहुंची और आज भी उनकी संघर्षशील परंपरा को याद किया जाता है।

‘होमी दाजी को याद करना जीवन मूल्यों और प्रतिबद्धता को याद करना है’

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के प्रदेश महासचिव शैलेंद्र शैली ने कहा कि होमी दाजी को याद करना केवल एक स्मरण या कर्मकांड नहीं है, बल्कि उन जीवन मूल्यों, पक्षधरता, प्रतिबद्धता, क्रांतिकारी चेतना और सामाजिक चेतना के विकास की यात्रा को याद करना है, जिसकी आज भी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय की चुनौतियों के बीच होमी दाजी का जीवन प्रतिरोध और संघर्ष की चेतना को मजबूत करने की प्रेरणा देता है।

शैली ने अपने संबोधन में कहा कि उनके अनुसार देश में लोकतांत्रिक मूल्यों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता और प्रगतिशील मूल्यों को लेकर चुनौतियां मौजूद हैं। उन्होंने धर्म के उन्माद और नफरत की राजनीति के प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि मजदूर आंदोलन में वर्ग चेतना और वर्ग संघर्ष की भावना को मजबूत बनाए रखने की जरूरत है। उन्होंने वामपंथी और समाजवादी संगठनों द्वारा ट्रेड यूनियन आंदोलन में किए जा रहे काम का भी उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि होमी दाजी के जीवन से यह भी सीखा जा सकता है कि व्यक्ति अपने व्यक्तिगत हितों और पहचान से ऊपर उठकर सामूहिकता के लिए काम कैसे करता है। एक पारसी समुदाय से आने वाले व्यक्ति के रूप में होमी दाजी का मजदूर आंदोलन और व्यापक सामाजिक सरोकारों से जुड़ना उनके व्यक्तित्व की विशिष्टता को सामने लाता है।

शैली ने कहा कि होमी दाजी केवल ट्रेड यूनियन आंदोलन के प्रतिनिधि नहीं थे। उनके अनुसार वे कम्युनिस्ट आंदोलन के साथ-साथ लेखकों, बुद्धिजीवियों, संस्कृतिकर्मियों और पत्रकारों के बीच भी सक्रिय रहे। उन्होंने कहा कि इंदौर, मध्य प्रदेश, ट्रेड यूनियन आंदोलन और कम्युनिस्ट आंदोलन के इतिहास में होमी दाजी के दौर को महत्वपूर्ण रूप से याद किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि होमी दाजी की जन्म शताब्दी के समापन पर उन्हें याद करने के साथ यह विचार भी जरूरी है कि उनकी संघर्षशील परंपरा को आगे कैसे बढ़ाया जाए। उन्होंने वर्ग चेतना को मजबूत करने, नफरत और धार्मिक उन्माद के विरोध तथा सामूहिकता की भावना विकसित करने की जरूरत पर जोर दिया।

‘ट्रेड यूनियनों की एकजुटता से मजबूत हुआ मजदूर आंदोलन’

इंटक के प्रदेश अध्यक्ष श्यामसुंदर यादव ने होमी दाजी से जुड़े अपने पुराने संस्मरण साझा करते हुए इंदौर के मजदूर आंदोलन और विभिन्न ट्रेड यूनियनों के बीच सहयोग के दौर का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि वे बचपन में इंदौर आए थे और उनके पिता हुकमचंद मिल में काम करते थे। उस समय होमी दाजी भी उनके निवास के आसपास रहते थे।

यादव ने 1991 के दौर का उल्लेख करते हुए बताया कि टेक्सटाइल उद्योग के संकट के समय एआईटीयूसी के नेता होमी दाजी, इंटक के नेता एवं श्रम शिविर के संस्थापक वेंकटेश विष्णु द्रविड़, हिंद मजदूर सभा के विरेश्वर त्यागी और अन्य ट्रेड यूनियन नेता इंदौर आए थे। मालवा मिल कम्युनिटी हॉल में हुई बैठक में विभिन्न ट्रेड यूनियनों के नेताओं ने इस बात पर जोर दिया था कि अलग-अलग मंचों पर संघर्ष करने के बजाय कपड़ा मजदूरों के सवाल पर एक मंच पर आना जरूरी है।

उन्होंने बताया कि इसके बाद 1991 से 2012 तक टेक्सटाइल मजदूरों के सवाल पर विभिन्न ट्रेड यूनियनों ने मिलकर संघर्ष किया। उनके अनुसार इस प्रक्रिया में अलग-अलग केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के साथ भारतीय मजदूर संघ ने भी भागीदारी की। वर्ष 2012 में यह दायरा केवल टेक्सटाइल तक सीमित न रखकर सभी क्षेत्रों के मजदूरों के लिए साझा मंच की दिशा में आगे बढ़ा।

यादव ने मजदूरों की पेंशन का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने बताया कि एक दौर में कपड़ा मिल मजदूरों की पेंशन 150 से 300 रुपये के बीच थी और विभिन्न केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त आंदोलन के दौरान इसे बढ़ाकर 1000 रुपये करने की मांग रखी गई थी। उन्होंने कहा कि बाद में पेंशन बढ़ाने की मांग को लेकर कई आंदोलन हुए, लेकिन उनके अनुसार यह राशि लंबे समय तक 1000 रुपये ही रही। उन्होंने 2016 में पेंशन बढ़ाकर 15 हजार रुपये करने की मांग और प्रधानमंत्री से हुई कथित बातचीत का भी उल्लेख किया।

होमी दाजी और वेंकटेश विष्णु द्रविड़ के संबंधों का संस्मरण सुनाते हुए यादव ने कहा कि दोनों अलग-अलग ट्रेड यूनियन धाराओं से जुड़े होने के बावजूद एक-दूसरे के प्रति गहरा स्नेह रखते थे। उन्होंने बताया कि एक अवसर पर अस्वस्थ द्रविड़ से मिलने होमी दाजी पहुंचे थे और दोनों के बीच आत्मीयता देखने को मिली। यादव ने इसे ट्रेड यूनियन आंदोलन में वैचारिक मतभेदों के बावजूद आपसी सम्मान और एकजुटता के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया।

कार्यकर्ताओं ने साझा किए संस्मरण

कार्यक्रम में प्रगतिशील लेखक संघ के राष्ट्रीय सचिव विनीत तिवारी, सुरेश उपाध्याय, चुन्नीलाल वाधवानी, बैंककर्मी नेता मोहन कृष्ण शुक्ल, विजय दलाल सहित अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित किया। आयोजन में विवेक मेहता, रामस्वरूप मंत्री, सत्येन वर्मा, कैलाश लिम्बोदिया, महिला फेडरेशन की सारिका श्रीवास्तव, वरिष्ठ अभिभाषक अंजुम पारेख, अशोक दुबे, प्रमोद बागड़ी, अभय नेमा, प्रकाश चंद्र पाठक, रामबाबू अग्रवाल, भागीरथ कछवाय, फादर पायस, कुमार सिद्धार्थ और देवास से कैलाश सिंह राजपूत सहित बड़ी संख्या में सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

पीथमपुर, नागदा, भोपाल और ग्वालियर सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए ट्रेड यूनियन नेताओं ने होमी दाजी के साथ अपने अनुभव और संस्मरण साझा किए। वक्ताओं ने उन्हें केवल ट्रेड यूनियन नेता के रूप में नहीं, बल्कि मजदूरों और आम लोगों के अधिकारों की आवाज के रूप में याद किया। उन्होंने कहा कि उनके जीवन से संगठित संघर्ष और जनभागीदारी के माध्यम से अधिकारों के लिए आवाज उठाने की प्रेरणा मिलती है।

डॉक्यूमेंट्री और जनगीतों ने जीवंत की स्मृतियां

कार्यक्रम के दौरान कामरेड होमी दाजी के जीवन और संघर्ष पर आधारित डॉक्यूमेंट्री फिल्म भी प्रदर्शित की गई। इसमें उनके राजनीतिक और सामाजिक जीवन, मजदूर आंदोलन में भूमिका तथा विभिन्न संघर्षों की झलक प्रस्तुत की गई। उपस्थित लोगों ने डॉक्यूमेंट्री को गंभीरता और रुचि के साथ देखा।

इसके बाद इप्टा की शर्मिष्ठा और उनकी टीम ने जनगीतों की संगीतमय प्रस्तुति दी। गीतों के माध्यम से मजदूर एकता, संघर्ष और सामाजिक परिवर्तन के संदेश को सामने रखा गया। इसके बाद कवि सत्येन वर्मा ने जावेद अख्तर की पंक्तियों का पाठ किया। उन्होंने कविता के माध्यम से कार्यक्रम में बने संगीत और स्मृति के वातावरण को आगे बढ़ाया।

कार्यक्रम का संचालन अरविंद पोरवाल ने किया। इंदौर सीपीआई के सचिव रुद्रपाल यादव ने अतिथियों, ट्रेड यूनियन नेताओं और आयोजन में सहयोग करने वालों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का समापन होमी दाजी की संघर्षशील परंपरा को आगे बढ़ाने तथा मजदूरों और आम जनता के अधिकारों के लिए एकजुट होकर काम करने के संकल्प के साथ हुआ।

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