नियामकीय सुधारों के बावजूद अनैतिक क्लिनिकल ट्रायल जारी : स्वास्थ्य अधिकार मंच
नर्ईदिल्ली, 21 अप्रैल। स्वास्थ्य अधिकार मंच पिछले 15 वर्षों से भारत में अनैतिक क्लिनिकल ट्रायल के मुद्दे को लगातार उठाता रहा है। वर्ष 2012 में इसे लेकर उच्चतम न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की गई थी, जिसमें देश में…
पृथ्वी दिवस : पृथ्वी के साथ छलबल ठीक नहीं
आज पृथ्वी दिवस हमें याद दिलाता है कि पर्यावरण संरक्षण केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि अस्तित्व का प्रश्न बन चुका है। ‘हमारी शक्ति, हमारा ग्रह’ थीम के साथ यह दिन अक्षय ऊर्जा और सतत विकास की ओर प्रेरित करता है। वनों…
धधकती धरती : विकास की अंधी दौड़ या विनाश का काउंटडाउन
ग्लोबल वार्मिंग की गिरफ्त में पृथ्वी धरती आज केवल गर्म नहीं हो रही, बल्कि मानवीय लालसाओं के कारण भीतर ही भीतर धधक रही है। हर वर्ष मनाया जाने वाला पृथ्वी दिवस हमें इस गंभीर पर्यावरणीय संकट की याद दिलाता है,…
पृथ्वी दिवस : एक चेतावनी, हम नहीं बदले तो पेट्रोल से महंगा होगा पानी
पृथ्वी दिवस अब उत्सव नहीं, चेतावनी बन चुका है। जल संकट गहराता जा रहा है, नदियां सूख रही हैं, पहाड़ उजड़ रहे हैं और शहरीकरण प्रकृति का संतुलन बिगाड़ रहा है। विशेषज्ञों की चेतावनी है कि यदि प्राकृतिक संसाधनों का…
विदेशी जीएम लॉबी के चंगुल में भारत की खाद्य संप्रभुता को खतरा, केंद्र को जीएम-मुक्त भारत गठबंधन ने किया आगाह
नई दिल्ली, 20 अप्रैल । जेनेटिकली मॉडिफाइड (जीएम) फसलों के आयात और उनके संभावित प्रभाव को लेकर देश में एक बार फिर बहस तेज हो गई है। ‘जीएम-मुक्त भारत गठबंधन’ (Coalition for a GM-Free India) ने केंद्र सरकार को एक…
कृत्रिम बुद्धिमत्ता बनाम प्रकृति : अरावली और हमारे संवैधानिक दायित्व
कृत्रिम बुद्धिमत्ता से तैयार प्रतीत होने वाला अरावली संबंधी सरकारी एफिडेविट भविष्य के लिए गंभीर चिंता पैदा करता है। इसमें न प्रकृति की समझ झलकती है, न सांस्कृतिक दृष्टि। संवैधानिक दायित्वों और अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण प्रतिबद्धताओं की अनदेखी से पहाड़ों का…
जेपी आंदोलन से पर्यावरण संघर्षों तक सक्रिय रहीं अनुराधा सिंह का निधन
सादगी, समर्पण और प्रकृति से गहरे जुड़ाव की मिसाल थीं भोपाल, 19 अप्रैल। विख्यात सर्वोदय नेता, विचारक और चिंतक आचार्य राममूर्ति जी की पुत्री, पर्यावरण शिक्षण और सजीव खेती से जुड़ी अनुराधा सिंह ( 80 वर्ष) का आज सुबह निधन…
‘जादूगर’ शब्द से क्यों डरती है सत्ता?
संसद में ‘जादूगर’ जैसे हल्के-फुल्के शब्द पर मचा विवाद यह संकेत देता है कि भारतीय राजनीति से हास्य और सहजता तेजी से गायब हो रही है। संवाद की जगह कटुता और आक्रामकता ने ले ली है, जहां व्यंग्य भी असहजता…
तीसरे विश्वयुद्ध की आहट और महात्मा गांधी
रूस-यूक्रेन, इजरायल-गाजा के बाद अब युद्ध पश्चिम एशिया में केन्द्रित होता दिख रहा है। क्या समूचे, भरे-पूरे, जीवन्त देशों को एक-एक करके समाप्त करने का यह कारनामा कच्चे माल, उसे ‘पकाने’ में लगने वाली जरूरी ऊर्जा और बेचने के लिए…
प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता और विचारक अनंतपद्मनाभन ने जीवन की तरह मृत्यु को भी साधकर ली अंतिम विदाई
सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव और साथी मित्र रहे अनंत गंगोला ने याद किए अनंत के जीवन के प्रेरक पल मैसूर, 19 अप्रैल। देश के जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता, विचारक और संस्थागत नेतृत्व के लिए पहचाने जाने वाले अनंतपद्मनाभन गुरुस्वामी का शनिवार,…









