‘भारतीय किसान संघ परिसंघ’ (सिफा) के तत्वावधान में भारत के किसान समुदाय को सशक्त बनाने, नवाचारों का अन्वेषण और भारतीय कृषि के भविष्य को आकार देने हेतु तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद स्थित ‘फेडरेशन ऑफ तेलंगाना चैंबर ऑफ कॉमर्स’ में दो दिवसीय राष्ट्रीय किसान सम्मेलन…
10 दिसम्बर : मानवाधिकार दिवस समाज में मानवाधिकारों के होने वाले उल्लंघन के प्रति अगर मानव ही जागरूक नहीं है तो फिर इनका औचित्य क्या है? देखे तो पता चलेगा की कितने मानवाधिकारों का हनन मानव के द्वारा ही किया…
वीजू कृष्णन रोटी, कपडा और मकान की तरह बिजली भी जीवन की बुनियादी जरूरत बन गई है। जाहिर है, इन चारों अपरिहार्य उपादानों ने सेठों को अकूत पूंजी कूटने के भरपूर अवसर दिए हैं। बिजली क्षेत्र में सरकारें, तरह-तरह के…
देखने, छूने, सूंघने और यदा-कदा चखने की इंद्रियों की मदद से होने वाली खरीद-फरोख्त को धता बताते हुए आजकल आनलाइन का चलन है जिसमें सीधे ऑर्डर करके जरूरत का सामान मंगाया जाता है। सरकार से लगाकर तमाम शोध संस्थान इस…
सर्व सेवा संघ के परिसर को जमींदोज करने के खिलाफ चल रहा सौ दिनी सत्याग्रह के 89वें दिन पूर्ण वाराणसी, 8 दिसंबर। सर्व सेवा संघ के राजघाट परिसर को वाराणसी एवं नॉर्दर्न रेलवे द्वारा षडयंत्र पूर्वक कब्जा कर अधिकांश भवनों…
पूंजी के फलने-फूलने के तौर-तरीकों में एक है, इंसानों को इंसानियत से बेदखल करके उन्हें मशीनों में तब्दील कर देना। मानवीय गुणों से वंचित मशीन-रूपी इंसान पूंजी के उत्पादन और मुनाफा कूटने के लिए बेहद मुफीद होता है। क्या होती…
अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय, भोपाल का वार्षिक जलवायु महोत्सव अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय, भोपाल ने अपने वार्षिक जलवायु महोत्सव के तीसरे वर्ष ‘माउंटेन्स ऑफ लाइफ’ का सात दिवसीय महोत्सव जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूकता बढ़ाने और पर्यावरण के साथ लोगों के गहरे…
राष्ट्रभाषा प्रचार समिति,भोपाल द्वारा दिये जाने वाले सम्मान घोषित भोपाल, 4 दिसंबर। मध्य प्रदेश राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, हिंदी भवन, भोपाल द्वारा दिए जाने वाले वार्षिक सम्मानों की घोषणा समिति के संचालक श्री कैलाशचंद पंत ने एक विज्ञप्ति जारी करके कर…
आंदोलन को धार देने के लिए अगला राष्ट्रीय सम्मेलन कहलगांव में चार दशक बाद फिर से नई चुनौतियों से लड़ने के लिए गंगा मुक्ति आंदोलन फिर से मैदान में आ चुका है। बिहार के मुजफ्फरपुर के चंद्रशेखर भवन में गंगा…
अनुपम मिश्र यह साल दुनिया की भीषणतम औद्योगिक त्रासदी ‘भोपाल गैसकांड’ की चालीसवीं बरसी का साल है। क्या हुआ था, दो और तीन दिसंबर की दरमियानी रात को? और उसके बाद किस-किस ने, कैसे-कैसे, क्या-क्या किया? ‘सप्रेस’ के दस्तावेजों में…