अभी, करीब डेढ महीना पहले अपनी आजादी की आधी शताब्दी मना चुके बांग्लादेश ने 1971 में अपने गठन के साथ दो-राष्ट्रवाद के उस बेहूदे सिद्धांत को ही खारिज कर दिया था जिसने भारत विभाजन सरीखे तीखे, दर्दनाक संकट पैदा किए…
अकूत मुनाफा कूटने के लिए दुनियाभर को एक मानने वाले, नब्बे के दशक के भूमंडलीकरण के बाद, अब लगभग सभी देशों में राष्ट्रवाद की हवा चली है। ऐसे में चीन अपनी पूंजी और सामरिक ताकत के साथ दुनियाभर को घेरने…
सकारात्मक पत्रकारिता की तरह इन दिनों निष्पक्ष पत्रकारिता का चलन बढा है और जिस तरह सकारात्मक पत्रकारिता के नाम पर, अक्सर सत्ता-प्रतिष्ठानों की चापलूसी फल-फूल रही है, ठीक उसी तरह खुलेआम एक खास विचारधारा और सरकार की पक्षधरता के नाम…
राजनेताओं और समाज का काम करने वालों का जीवन हमेशा ही खतरों के साये में रहता है और वे एक तरह से अपने काम इस समझ और तैयारी के साथ ही तय करते हैं। भारत में इसके अनेक उदाहरण हैं…
वन पंचायत संघर्ष मोर्चा की मतदाताओं, प्रत्याशियों और राजनीतिक दलों से अपील जल, जंगल, जमीन पर स्थानीय समाज के हकों के सवाल ने उत्तराखंड राज्य को जन्म दिया था, परंतु इतने संघर्षों के पश्चात राज्य में यह हक निरंतर घटते…
3 फरवरी । नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेत्री और प्रखर वक्ता सुश्री मेधा पाटकर एवं सामाजिक कार्यकर्ता देवराम कनेरा, कैलाश यादव, राजा मंडलोई ने बजट पर टिप्पणी करते हुए कहा कि पिछले सालभर से अधिक समय जीवटता और शहादत के…
अत्याधुनिक उपकरणों की मदद से उस सरकार द्वारा अपने ही उन नागरिकों की जासूसी करना जिसे कि उन्होंने पूरे विश्वास के साथ अपनी रक्षा की ज़िम्मेदारी सौंप रखी है एक ख़तरनाक क़िस्म का ख़ौफ़ उत्पन्न करता है। ख़ौफ़ यह कि…
सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य बजट और बढ़ाने की मांग की है, जन स्वास्थ्य अभियान के अनुसार, कुल बजट में स्वास्थ्य का हिस्सा पिछले वर्ष की तुलना में 2.35% से घटकर 2.26% हो गया है। इसका मतलब यह भी है…
संसद में बजट प्रस्तुत करने वाली देश की वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के पास इस सहज सवाल का कोई जबाव है कि देश के कुल 63 अमीरों के पास उन्हीं के पिछले साल पेश किए गए केन्द्रीय बजट से ज्यादा सम्पत्ति…