Month: January 2022

राजनीति : हम बदलेंगे, तभी हमारी राजनीति भी बदलेगी

पिछले कुछ समय से एक नया विमर्श और सामने आया है कि जनता को मुफ्तखोर नहीं बनाया जाना चाहिए। इस विमर्श के पैरोकार, जहां भी उन्हें मौका मिलता है, पिछली सरकारों द्वारा हम सब में पनपाई गई इस तथाकथित मुफ्तखोरी…

खाद्य सुरक्षा : जरूरी है, जीएम के जहर से बचना

जीएम यानि ‘जेनेटिकली मोडीफाइड’ फसल अब फिर से चर्चा में है। यहां तक कि इसे ‘भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण’ (फूड सेफ्टी एंड स्टैण्डडर्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया, फसाई) अनुमति देने पर विचार कर रहा है। दूसरी तरफ, देश-विदेश की…

पंचायत चुनाव के लिए गांधीवादी संगठनों का मशविरा, दलों में बंटे बगैर मतदाता उम्मीदवार खुद चुने

भुवनेश्वर : ओडिशा में होने वाले पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी होते ही वार्ड मेम्बर से लेकर जिला पंचायत सदस्यों तक के प्रत्याशी चुनाव में उतरने की तैयारी में जुट गए हैं। संविधान के अनुसार वार्ड सदस्य, सरपंच, पंचायत समिति…

मेवात और गांधी: सत्य को दबाकर इतिहास बदला जा रहा है

नफरत और हिंसा से भरा पूर्वाग्रह अब भारत को धर्म-निरपेक्ष बनाकर जाति और वर्गों में बाँटना चाहता है। इसीलिए उनके हत्यारे अब सत्य और अहिंसा को केवल नफरत और हिंसा में बदलना, उनके सभी प्रतीकों को बदलकर, नष्ट करके इतिहास…

हीरा खोदकर हारे पन्ना-वासी

पिछले दिनों छतरपुर जिले के बक्सवाहा इलाके में हीरा उत्खनन को लेकर भारी बवाल मचा था। कई पर्यावरणविदों ने पानी के लिए तरसते बुंदेलखंड में जंगल कटाई का विरोध किया था तो अनेक स्थानीय लोगों ने रोजगार के लिए इस…

मीडिया का विकल्प, वैकल्पिक मीडिया

पूंजी के बाजार में एक व्यवसाय की हैसियत से मीडिया के आ जाने से अव्वल तो वह जन सामान्य को अनदेखा करते हुए, बाजार-हितैषी खबरों का अबाध स्रोत बन जाता है और दूसरे, उसकी मार्फत आम समाज की राय तय…

पूंजी के प्रभाव में महामारी

कोविड-19 की विश्वव्यापी महामारी ने पूंजी को भी खुलकर खेलने की छूट दे दी है। ऐसे में विज्ञान सम्मत, समझदारी की सलाहें दबाई जा रही हैं और मुनाफे की खातिर गैर-जरूरी दवाएं, इलाज और ताने-बाने को तरजीह दी जा रही…

विरासत स्वराज यात्रा : महात्मा गांधी का मेवात में जौहर

महात्मा गांधी ने मेवात को मेवात बनाए रखने के लिए बड़ा जौहर किया था। उस जौहर का परिणाम है कि आज मेवात अपनी जगह बसा हुआ है। बापू ने आजादी के बाद देश के बंटवारे को अपनी हार मानकर भी…

खाली पद और बेरोजगारी

बेरोजगारी की विडंबना का एक नमूना यह भी है कि एक तरफ लाखों सरकारी पद खाली पडे हैं और उन्हें भरने के लिए जगह-जगह से मांगें तक उठ रही हैं, लेकिन दूसरी तरफ, बाकायदा प्रशिक्षित, अनुभवी उम्मीदवार बेरोजगारी भुगत रहे…

उड़ीसा के पारादीप में जिंदल परियोजनाओं का गांधीवादी संगठनों ने किया कड़ा विरोध

भुवनेश्वर: पारादीप के पास जिंदल स्टील वर्क्स (जेएसडब्ल्यू) द्वारा 50,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से विश्वस्तरीय 1.2 करोड़ टन वार्षिक क्षमता वाले कारखाने, 900 मेगावॉट के बिजली संयंत्र और 3,000 एकड़ भूमि में खुद के इस्तेमाल (कैप्टिव) के बंदरगाह…