वरिष्ठ इतिहासकार डॉ. सुरेश मिश्र का गुरूवार (22 अप्रैल) की सुबह भोपाल में निधन हो गया । वे 84 वर्ष के थे। मध्यप्रदेश के इतिहास पर उन्होंने कई पुस्तकों का लेखन और अनुवाद किया। उदयपुर की ऐतिहासिक इमारतों के संरक्षण…
व्यवस्था के प्रति लोगों का यकीन समाप्त होकर मौत के भय में बदलता जा रहा है। सबसे ज़्यादा दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति तो तब होगी जब ज़िम्मेदार पदों पर बैठे हुए लोग सांत्वना के दो शब्द कहने के बजाय जनता में व्याप्त…
22 अप्रैल : विश्व पृथ्वी दिवस पर विशेष प्रकृति को पस्त करके विकसित होने की मारामार में लगा कथित आधुनिक समाज अपने को कालजयी मानने की गफलत भी पाले रहता है, हालांकि उसे अक्सर अपनी इस मान्यता की कीमत भी…
पृथ्वी पर प्रकति का संतुलन बनाये रखने तथा भविष्य में जीवन जीने के लिए प्राकृतिक संपत्ति व संसाधनों को बनाये रखना अति आवश्यक है। धरती को बचाने का आशय है इसकी रक्षा के लिए पहल करना। पृथ्वी हमारा घर है और…
22 अप्रैल : विश्व पृथ्वी दिवस इक्कीसवीं सदी आते-आते पर्यावरण की बदहाली ने हमें लगातार उसे याद रखने की मजबूरी के हवाले कर दिया है। विश्व पृथ्वी दिवस को वैश्विक जलवायु (Global warming) संकट के प्रति जागरुकता लाने के…
गरीबी कोई दबी-छिपी, अर्थशास्त्रियों के अबूझ आंकडों भर की बात नहीं रही है। देशभर में अचानक बेरोजगार हुए ग्रामीण मजदूरों ने कठिन हालातों में, पैदल अपने-अपने गांव-देहात लौटकर सबको गरीबी और भुखमरी के दर्शन करवा दिए थे। ऐसे में क्या…
इस समय हमारे शासक अपने ही नागरिकों से हरेक चीज़ या तो छुपा रहे हैं। धोखे में रखा जा रहा है कि किसी भी चीज़ की कोई कमी नहीं है। वैक्सीन, ऑक्सिजन, रेमडेसिविर इंजेक्शन, अस्पतालों में बेड्स, डाक्टर्स आदि का…
इंदौर में बसी बेटी ने प्रकाशित की पिता के आलेखों की पुस्तक इंदौर। इंदौर में रहने वाली बेटी साहित्यकार श्रीमती पद्मजा बाजपेयी ने लगभग 102 वर्ष की आयु के पिता पंडित श्री विश्वम्भरनाथ तिवारी की पहली पुस्तक “आर्यावर्त से इण्डिया…
हमारे देश में ऊर्जा यानि बिजली का अधिकांश हिस्सा कोयले से बनाया जाता है, लेकिन उसे धरती से निकालने वाले मजदूर बेहाल हैं। कोविड-19 बीमारी के चलते देशभर में समय-समय पर लगा ‘लॉकडाउन,’ कोयला खदानों पर कोई खास असर तो…
भूख हमारे समय की सर्वाधिक व्यापक और गहराई से महसूस की जाने वाली सचाई है, लेकिन उससे निपट पाने की कोई कारगर तजबीज अब तक हाथ नहीं लगी है। एक तरफ, तरह-तरह के खाद्य-सुरक्षा कानूनों और सरकारी, गैर-सरकारी प्रयासों के…