ध्यान से देखें तो आजादी के बाद से ही गांधी और उनके बाद विनोबा ने लगातार हमारे विकास की बातें की हैं। ये बातें सम-सामयिक सत्ता-प्रतिष्ठानों को कभी नहीं सुहाई और नतीजे में अब हम विकास को विनाश की संज्ञा…
विनोबा भावे गांधीजी की परंपरा में आते हैं। विनोबाजी का जीवन अपने आप में त्याग और तपस्या की प्रतिमूर्ति था। उनके ’भूदान आंदोलन’ ने देश के हजारों लोगों को भूमि दिलाकर जीने का साधन उपलब्ध कराया। एक व्यक्ति से संपत्ति…
चित्रकार, लेखक दिलीप चिंचालकर का पार्थिव शरीर पंचतत्व में लीन 14 नवंबर। एक मौन चित्रकार, पत्रकार, जिंदगी के कैनवास को खूबसूरत रंगों से सजाने संवारने वाले, प्रकृति सेवक और अपनी मौज में जीने वाले दिलीप चिंचालकर का पार्थिव शरीर आज…
जाने माने चित्रकार, लेखक दिलीप चिंचालकर का 13 नवंबर की शाम 7.56 बजे इंदौर में देहांत हो गया है। वे पिछले कुछ वर्षों से कठिन बीमारी से जूझ रहे थे। वे पिछले कुछ दिनों से अस्पताल में भर्ती थे। होनहार…
अहिंसा का रास्ता ही लोकनायक जे.पी. ने पकड़ा था। उनके बनाये सम्पूर्ण क्रांतिदूतों ने भी अहिंसा को ही अपनाया है। इनके जीवन में अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्यचर्य, असंग्रह, शरीर-श्रम, अस्वाद, सर्वत्र भयवर्जन, सर्वधर्म समानत्व, स्वदेशी स्पर्श भावना को विनम्रतापूर्ण से…
पिछली सदी में जहां अनेक देशों ने लोकतंत्र को एक बेहतर शासन-प्रणाली की तरह अंगीकार किया गया था, अब उसी लोकतंत्र की चपेट में पड़े कराह रहे हैं। जगह-जगह लोकतंत्र के नाम पर तानाशाहों, एक-आयामी विचारधाराओं और फर्जी सत्ताओं ने…
इमारतों के निर्माण में रेत यानि सिलिका बहुत अहम भूमिका निभाती है, लेकिन क्या ‘जीडीपी’ में सर्वाधिक योगदान करने वाली इस गतिविधि को आम लोगों और उनके साथ पर्यावरण को उजाडने की छूट दी जा सकती है? इन दिनों मध्यप्रदेश,…
ताप्ति नदी पर प्रस्तावित चिल्लूर बांध के विरोध में गांवों में बैठकों का दौर शुरू मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में ताप्ति नदी पर प्रस्तावित चिल्लूर बांध के खिलाफ पंचायतें लामबंद होना शुरू हुई है। अभी हाल ही में पिछले दिनों…
कोविड-19 महामारी से उपजी आर्थिक महामंदी ने बाजारों में खलबली मचा दी है। इससे निपटने के लिए तरह-तरह की सरकारी राहतों के अलावा नोट छापकर बांटने तक के सुझाव दिए जा रहे हैं। क्या महात्मा गांधी, जिन्होंने 1930 की पिछली…
साम्प्रदायिक और नस्लीय अलगाव के इस दौर में ब्रिटेन का यह उदाहरण काबिल-ए-तारीफ है जिसमें पचास पेंस का ‘डायवर्सिटी क्वाइन’ जारी करके वहां की सरकार ने बता दिया है कि वह देश किसी एक जाति, धर्म, भाषा, खान-पान और रहन-सहन…