Soviet Union

गांधी का ‘हिंद स्वराज’ : उथल-पुथल में उपयोगी

दुनिया के अधिकांश देशों में मची भीषण उथल-पुथल आमतौर पर लोकतंत्र के हवाले से की जा रही है। ऐसे में गांधी होते तो क्या कहते/करते? इंग्लेंड-अफ्रीका की अपनी जहाज-यात्रा में 116 साल पहले लिखी पुस्तिका ‘हिंद स्वराज’ में उन्होंने मौजूदा…

कितने कारगर हैं लोकतंत्र, मार्क्सवाद और धर्म ?

उम्र के नौ दशक से अधिक वर्ष पार कर चुके पत्रकार, कॉमरेड एलएस हरदेनिया ने अपने इस लेख में विचार, खासकर अनूठे विचारों की जरूरत और मौजूदा समय की कमजोरियों पर उंगली रखी है। वे पूछते हैं कि बीसवीं, इक्कीसवीं…