अंग्रेजों और चंद तरक्की-पसंद हिन्दुस्तानियों की पहल पर लगभग एक सदी पहले बाल-विवाह विरोधी कानून बना था, लेकिन देश के किसी राज्य में आज तक बाल-विवाह पर कोई कारगर प्रतिबंध नहीं लग पाया है। देश के अधिकांश राज्यों में, कुछ अपवादों…
पढे-लिखे आधुनिक समाज में जंगल को बर्बरता, असभ्यता और पिछडेपन का ऐसा प्रतीक माना जाता है जिसमें ‘सर्वाइवल ऑफ दि फिटेस्ट’ यानि ‘सक्षम की सत्ता’ ही एकमात्र जीवन-मंत्र है, लेकिन क्या सचमुच ऐसा ही है? जंगल को जानने-समझने वाले इसके…
दुनिया भर में जो महिलायें हत्या का शिकार होती हैं, उनमें से चालीस फीसदी की हत्या की जाती है, उनके पूर्व प्रेमियों या पतियों द्वारा. घर महिलाओं के लिए एक खतरनाक युद्धभूमि बन जाता है, जहाँ सबसे अधिक रक्तपात की…
जीने के अधिकार में माननीय गरिमा के साथ जीना सम्मिलित है। जब तक व्यक्ति के जीवन का समापन प्राकृतिक रूप से नहीं होता है तब तक यह अधिकार यथावत रहेगा। भारतीय कानून आत्महत्या को अपराध मानता है तथा वह कुछ…
संविधान में आदिवासियों को मिले विशेष दर्जे को आमतौर पर अनदेखा किया जाता रहा है। मसलन – राज्यपालों को अनुसूचित क्षेत्रों में विशेषाधिकार दिए गए हैं, ताकि वे आदिवासियों की विशिष्ट जीवन पद्धतियों, खान-पान और भाषा आदि को देखते हुए…
समाचार पत्रों एवं विभिन्न संचार माध्यमों के द्वारा आए दिन हमें सायबर अपराधों के समाचार पढ़ने को मिलते रहते हैं। इन घटनाओं में कुछ व्यक्तियों के काफी बड़े-बड़े नुकसान के समाचार भी होते हैं। लेकिन इन सब में एक ‘‘सामान्य…
न्यायाधीशों की नियुक्तियों में सर्वोच्च न्यायालय एवं केन्द्रीय सरकार के मध्य निरंतर टकराव चलता रहता है। विचाराधीन बड़ी संख्या के प्रकरणों के अंबार को देखते हुए सर्वोच्च न्यायालय, न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि करने के लिए आग्रह करता रहा है…