एल.एस. हरदेनिया भाषा की ताकत कितनी होती है। यदि उसका समर्थन होता है तो वह भी अद्भुत और यदि इसका विरोध होता है तो भी अद्भुत। हमारे साथ-साथ चीन में भी आज़ादी आई, परंतु वहां के नेतृत्व ने एक विशेष भाषा…
पत्रकारिता के एक महान् पुरोधा पुरुष, मजबूत कलम एवं निर्भीक वैचारिक क्रांति के सूत्रधार, उत्कृष्ट राष्ट्रवादी, हिन्दीसेवी, ‘भाषा’ के मुख्य सम्पादक, नवभारत टाइम्स के सम्पादक, डॉ. वेदप्रताप वैदिक अब हमारे बीच नहीं रहे। मंगलवार (14 मार्च 23) सुबह उनका निधन…
लंबे कूटनीतिक प्रयासों के बाद हाल में हिंदी, उर्दू और बांग्ला भाषाओं को ‘संयुक्त राष्ट्र संघ’ में मान्यता मिल गई है। दक्षिण एशिया की इन तीनों भाषाओं को बोलने वाली विशाल आबादी दुनियाभर में फैली है और अब समय आ…
हिंदी को संस्कृत निष्ठ बनाने का सिलसिला थमा नहीं है और न ही हिंदी को सांप्रदायिकता की जुबान बनाने की कोशिश ठहरी है। तमाम गैर हिंदी भाषी राजनेता सीखी हुई हिंदी बोलते हैं और बड़े जनसमुदाय को प्रभावित करते हैं।…
अदालतों में हिंदी और स्थानीय भाषाओं में कार्रवाई की मांग को लेकर बरसों से बहस चलती रही है, लेकिन अब सुप्रीमकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की पहल पर इसे मंजूर किया गया है। न्याय की आस में अदालतों के दरवाजे ठक-ठकाते…