प्रजातंत्र में निष्पक्ष चिंतन राज्य, सरकार और समाज को सर्वजन-हिताय बनाए रखता है, लेकिन हमारे यहां के मौजूदा पार्टी-प्रधान ढांचे ने पक्षधरता की बेहद कमजोर छवि बनाई है। नतीजे में समूचा तंत्र शिथिल होता जा रहा है। क्या हैं, पक्षधरता…
अपनी शुरुआत में भले ही प्रजातंत्र ने गहरी असहमतियां झेली हों, लेकिन धीरे-धीरे वह एक ऐसी शासन-प्रणाली बन गया जिसके बिना दुनिया के अधिकांश देश अपने काम-काज नहीं चला पाते। जिन देशों में प्रजातंत्र नहीं है वहां उसे लाने के…
करोड़ों ग़रीबों को मुफ़्त का अनाज बाँटा जा सकता है पर उन्हें भारत रत्नों से विभूषित करके भी राजनीतिक विपक्ष की तरह तोड़ा नहीं जा सकता। न तो नीतीश और न ही जयंत चौधरी ही देश के असली विपक्ष का…
चक्रेश जैन फर्ज़ी मतदान रोकने में ‘अमिट स्याही’ की अहम भूमिका रही है। अमिट स्याही की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे मिटाया अथवा धोया नहीं जा सकता। बैंगनी रंग की यह स्याही आम चुनाव का प्रतीक बन गई…
लोकतंत्र में विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका की बार-बार उजागर होती नाकामियों की एक वजह उनका मौके पर मौजूद ना रहना भी है जिसकी एक वजह प्रशासनिक इकाइयों का विशाल आाकार है। तो क्या अपेक्षाकृत छोटे राज्य ज्यादा कारगर हो सकते…
तीन मई को मणिपुर के एक शहर चूराचांदपुर में मैतेई समाज को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने के खिलाफ निकाले गए विशाल जुलूस के बाद भड़की भयानक हिंसा ने अब समूचे उत्तर-पूर्व को अपनी चपेट में ले लिया है। ऐसे…
तमाम लोकतांत्रिक-संवैधानिक मर्यादाओं को धता बताते हुए हाल में संसद के नए भवन का उद्घाटन किया गया है। इस पूरे कार्यक्रम में एक तमाशा दक्षिण के चोल वंश के राजदंड ‘सेंगोल’ को लोकतंत्र का मंदिर कही जाने वाली संसद में…
दुनियाभर के राजनीतिक विश्लेषक प्रजातांत्रिक शासन प्रणाली की अहमियत और श्रेष्ठता पर कमोबेश एकमत हैं। सभी मानते हैं कि अपनी तमाम कमी-बेसियों के बावजूद प्रजातांत्रिक व्यवस्था किसी भी समाज को बेहतर बनाने के लिए सर्वाधिक उपयुक्त है। प्रजातांत्रिक शासन प्रणाली…
अभ्यास मंडल की 62 वीं ग्रीष्मकालीन व्याख्यानमाला में सांसद मनीष तिवारी का व्याख्यान इंदौर, 17 मई। सांसद एवं कांग्रेस के प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा है कि लोकतंत्र Democracy की रक्षा के लिए संवैधानिक संस्थाओं को चुनौतियों से बचाना नागरिकों…
लगभग सौ साल पहले महात्मा गांधी ने ‘नमक सत्याग्रह’ के दौरान लोकतंत्र की जो उद्घोषणा की थी, आज राहुल गांधी को दी गई सजा और उसके निहितार्थों ने उसकी याद दिला दी है। आखिर राहुल गांधी का दोष क्या है?…