10 मार्च 2025 को जारी केंद्र सरकार की नई एडवाइजरी ने देश भर के छोटे और मझोले समाचार पत्र-पत्रिकाओं के भविष्य पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। रोज़ाना ऑनलाइन विवरण जमा करने की अनिवार्यता ने जहां बड़े मीडिया समूहों…
मौजूदा आम चुनावों में सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी ओर से नागरिकों को थोक में तरह-तरह की ग्यारंटी दे रहे हैं, लेकिन किसी का ध्यान जीवन की बुनियादी जरूरत, हवा और पानी की ग्यारंटी की तरफ नहीं है। क्या इन दोनों…
अंग्रेजों की नजर से ‘मिडिल-ईस्ट’ यानि ‘मध्य-पूर्व’ माने गए अरब देशों में जिस तरह की आपसी और आंतरिक लडाईयां जारी हैं, हाल का इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष उसी का एक विस्तार है। योरोप और अमरीका के अमीर देशों की तेल और दूसरे…
तीन दशक पहले 73वें संविधान संशोधन की मार्फत पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं को आरक्षण मिला था। आज उस आरक्षण के बूते सक्षम हुईं महिलाओं की क्या स्थिति है? ग्रामीण महिलाएं घर सजाने, खाना बनाने, बच्चे पालने और कपड़े सिलने के अलावा…
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने अपने ‘एक दिन के डिक्टेटर’ बनने पर जिस शराब को पूरी तरह प्रतिबंधित करने के मंसूबे बांधे थे, वही शराब सरकारों की राजस्व उगााही का बडा स्रोत बन गई है। शराबबंदी का मुद्दा उभरते ही हर…