Constitution

आदिवासियों की बदहाली के संवैधानिक गुनहगार

संविधान में आदिवासियों को मिले विशेष दर्जे को आमतौर पर अनदेखा किया जाता रहा है। मसलन – राज्यपालों को अनुसूचित क्षेत्रों में विशेषाधिकार दिए गए हैं, ताकि वे आदिवासियों की विशिष्ट जीवन पद्धतियों, खान-पान और भाषा आदि को देखते हुए…

समाज के अंदर जब तक तर्क वितर्क नहीं होगा वो आगे नहीं बढ़ेगा

मशहूर वैज्ञानिक, सामाजिक कार्यकर्ता और ग़ज़लगो गौहर रज़ा ‘कोरोना के बाद का भारत’ श्रृंखला के अंतर्गत 4 जुलाई को तर्कवादी समाज का निर्माण विषय पर वर्कर्स यूनिटी के फेसबुक लाइव पर बोलते हुए मशहूर वैज्ञानिक, सामाजिक कार्यकर्ता और ग़ज़लगो गौहर…

क्या लोकतंत्र के असली स्वरूप तलाशने की संभावनाएँ खत्म हो चुकी हैं?

विकास की अंधी दौड़ में गरीबी, भुखमरी, कुपोषण, बेरोजगारी, अन्याय, शोषण, भ्रष्टाचार, बलात्कार, हिंसा हमारे ऊपर हावी हो रही है। लोक, जो कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे बड़ा घटक है, गायब हो चुका है। सियासत और भ्रष्टाचार का यह गठजोड़…