दस साल पहले उभरा गैर-दलीय राजनीति करने वाले संगठनों, संस्थाओं और सरोकार रखने वाले व्यक्तियों के जमावड़े का विचार अब अपने ठोस रूप में दिखाई देने लगा है। ‘विकल्प संगम’ के तहत देश भर के करीब सौ संगठन मिलजुलकर वैकल्पिक…
आम लोगों से भिन्न गांधीजी का पहनना-ओढ़ना भी एक व्यापक राजनीतिक-सामाजिक कार्रवाई का हिस्सा होता था। दक्षिण भारत की यात्रा के दौरान पारंपरिक काठियावाडी वस्त्रों को छोड़कर लंगोट धारण करना उनकी ऐसी ही एक पहल थी। कैसे हुआ,यह बदलाव? गांधीजी…
महात्मा गांधी ने अपने विचारों के क्रियान्वयन के लिए अनेक संस्थाओं का निर्माण किया था। 48 में, उनके जाने के बाद सभी को मिलाकर दो प्रमुख संस्थाएं बनाई गईं, परन्तु आज इन संस्थाओं के क्या हाल हैं? क्या आज भी…
हथकरघा उद्योग आज भी रोजगार का एक कारगर साधन है, लेकिन हमारी सरकारें और उनकी नीतियां उसे अपेक्षित महत्व नहीं देतीं। नतीजे में यह उद्योग ठप्प होता जा रहा है। फिलहाल क्या हालत है, हथकरघा उद्योग की? सात अगस्त, 1905 को…
बहुचर्चित अडाणी कंपनी पर लगाए जा रहे अनेक आरोपों में एक है, ‘सार्वजनिक क्षेत्र’ के रेल, गैस, बिजली, बंदरगाह, हवाई-अड्डों जैसे अनेक उपक्रमों को थोक में खरीदना। सवाल है कि इन बेहतरीन, कमाऊ और ‘नवरत्न’ तक कहे जाने वाले ‘सार्वजनिक…