भारतीय संविधान की 75वीं वर्षगांठ पर संसद में जो दृश्य सामने आए, वे डॉ. भीमराव अंबेडकर की आत्मा को व्यथित कर सकते हैं। संविधान निर्माता को हथियार बनाकर की जा रही राजनीति न केवल लोकतंत्र की मूल आत्मा के विपरीत…
भारत की डेमोक्रेसी को कागज से जमीन पर उतारने की जरूरत इंदौर, 26 नवंबर। वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश ने कहा है कि भारत की डेमोक्रेसी को कागज से जमीन पर उतारने की जरूरत है । हमारे संविधान में देश को धर्मनिरपेक्ष…
75 वें गणतंत्र दिवस पर विशेष संविधान की अवधारणा भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न एवं लोकतंत्रात्मक गणराज्य के रूप में स्थापित करती है। यही हमारा धर्मग्रंथ है। नागरिकों के आर्थिक एवं राजनीतिक न्याय के साथ प्रतिष्ठा एवं अवसर की…
केन्द्र की सत्ता पर काबिज पार्टियों की मनमर्जी से मनचीते चुनाव आयुक्तों की बहाली पर अब सुप्रीम कोर्ट के हाल के फैसले से रोक लगने की संभावना है,लेकिन क्या यह मौजूदा राजनीतिक जमातों के चलते संभव होगा? क्या बेलगाम लोकतांत्रिक…
देश के ‘प्रीमियम’ शिक्षण संस्थानों में भांति-भांति के दबावों के चलते होने वाली आत्महत्याएं और इनमें भी दलितों, आदिवासियों, पिछडों और अल्पसंख्यकों की बहुतायत हमारी शिक्षा-पद्धति से लगाकर सामाजिक ताने-बाने तक पर गंभीर सवाल खडे कर रही हैं। क्या हैं,…
48 वें सर्वोदय समाज सम्मेलन के अंतिम दिन राजनीतिक प्रस्ताव पारित Sewagram सेवाग्राम, वर्धा,16 मार्च, 2023। 48वें सर्वोदय समाज सम्मेलन sarvodaya samaj sammelan के समापन पर एक राजनीतिक प्रस्ताव पारित करके मौजूदा सत्ता की वैचारिकी पर देश के अहिंसक समाज…
आजकल लौट-लौटकर यह बात पुख्ता होती जा रही है कि मौजूदा संकटों से निपटने में गांधी की भूमिका अहम हो सकती है। आज के राजनीतिक हालातों को ही देखें तो गांधी की वसीयत से कुछ सुझाव सीखे-समझे जा सकते हैं।…
संविधान में आदिवासियों को मिले विशेष दर्जे को आमतौर पर अनदेखा किया जाता रहा है। मसलन – राज्यपालों को अनुसूचित क्षेत्रों में विशेषाधिकार दिए गए हैं, ताकि वे आदिवासियों की विशिष्ट जीवन पद्धतियों, खान-पान और भाषा आदि को देखते हुए…
जौरा में तीन दिवसीय बागी आत्मसमर्पण स्वर्ण जयंती समारोह का समापन जौरा मुरैना। 16 अप्रैल। बागी आत्मसमर्पण की स्वर्ण जयंती समारोह के समापन अवसर पर यहां विगत तीन दिनों में हुई चर्चाओं के आधार पर तय किया गया कि परिवार,…
लोकतांत्रिक प्रणाली में विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका आपसी संतुलन बनाकर काम करती हैं, यानि इनमें से कोई भी, किसी तरह की गडबडी करे तो बाकी के अंग उसे सुधारने के लिए अंकुश लगाते हैं, लेकिन मौजूदा दौर की घटनाएं लोकतंत्र…