भारत के राजनीतिक पटल पर डॉ. अंबेडकर का आगमन जाति प्रथा के खिलाफ संघर्ष से आरंभ हुआ और गोलमेज कांफ्रेंस से लेकर ‘पूना पेक्ट,’ महात्मा गांधी से विरोध और संविधान निर्माण तक व्यापक रहा। सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ अहिंसक आंदोलनों…
एक सौ से अधिक रचनात्मक संस्थाओं और व्यक्तियों ने की हस्तक्षेप करने की मांग देश के विभिन्न जन आंदोलनों, संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और अमन-प्रेमी आम नागरिकों की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक खुला पत्र लिखकर पिछले कुछ समय…
संदर्भ पेगासस जासूसी दो सौ से ज्यादा सालों तक हमारे ऊपर बलपूर्वक शासन करनेवाले अंग्रेज खोज कर भी जितने देशद्रोही नहीं खोज पाए थे, हमने महज सात सालों में उससे ज्यादा देशद्रोही पैदा कर दिए। अब तो शंका यह होने…
आज, महात्मा गांधी को विदा हुए सात दशकों बाद, कोई यदि उन्हें समझना, आत्मसात करना और जीवन में उतारना चाहे तो क्या करे? गांधी को साक्षात देखने और साथ काम करने वाले संगी-साथी और उनकी बनाई संस्थाएं अब नकारा हो…