आपके पास जो है, वह औरों से अच्छा है, अधिक पाने की इच्छा नहीं रखनी चाहिए

किशन पटनायक के किस्से  पत्नी वाणी की जुबानी 

डॉ.  सुनीलम 

डॉ. सुनीलम

किशन पटनायक भारत के प्रमुख समाजवादी चिन्तक और कर्मी रहे हैं। भारतीय राजनीति में जनांदोलनों की बढ़ती भूमिका को उन्होंने बहुत पहले पहचाना, समझा, उनसे एक रिश्ता बनाया और उन्हें एक वैचारिक दिशा देने की कोशिश की। व्यवस्था-परिवर्तन की किसी भी प्रक्रिया में वे किसानों और किसान आन्दोलनों की एक महत्वपूर्ण भूमिका मानते थे। वे अपने पूरे जीवन काल तक किसानों, मजदूरों, आदिवासियों, दलितों और समाज के अन्य शोषित और वंचित तबकों के लिए विभिन्न जनांदोलनों से सक्रिय तौर पर जुडे रहे। किशन पटनायक के जन्‍म दिवस (30 जून) पर उनकी पत्‍नी वीणा से सुनीलम की हुई बातचीत का सार संक्षेप।

समाजवादी चिंतक डॉ. राम मनोहर लोहिया के अत्यंत नजदीकी साथी रहे किशन पटनायक के व्‍यक्तित्‍व से देश परिचित है। देश ने किशन पटनायक को प्रजा सोशलिस्ट पार्टी  के सम्बलपुर के सबसे युवा सांसद के तौर पर देखा। उन्होंने पूरा जीवन आदिवासियों, किसानों एवं वंचित तबकों के बीच खपा दिया। अपने जीवन काल में उन्हें सिद्धांतकार के तौर पर माना जाने लगा था। किशनजी जन आंदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय के संस्थापकों में प्रमुख थे। एक समय में समाजवादी युवजन सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे। किशनजी सोशलिस्ट पार्टी में राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय रहे। उन्होंने समता संगठन, समाजवादी जन परिषद जैसे अनेक संगठनों का गठन किया। उन्‍होंने नए युवाओं को समाजवादी आंदोलन के साथ जोड़कर उन्हें स्वतंत्र समाजवादी नेता के तौर पर स्थापित किया।  उनके आभा मंडल तथा समाजवादी सिद्धांत से प्रभावित होकर, जो लोग राजनीति में आए, उनमें से कुछ को देश ने जाना और माना।

नीतीश कुमार जेपी आंदोलन के समय से ही किशनजी के बहुत करीब थे। योगेंद्र यादव भी किशनजी के प्रिय रहे, जो स्वराज इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष है। बरगढ़ उड़ीसा का जिला  किशनजी का कर्म क्षेत्र रहा। वहां से शुरू होकर पूरे पश्चिम उड़ीसा में जो सशक्त आंदोलन चला उसके वे जनक थे। लिंगराज भाई आज उस किसान आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं। वेदांता के खिलाफ़ नियमगिरि आंदोलन के जनक दूसरे लिंगराज आज़ाद आजकल समाजवादी जन परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष है।

मेरी किशनजी के साथ ज्यादा मुलाकात केसला (होशंगाबाद) में सुनील भाई द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में हुई या मेरे गुरु देव प्रोफेसर विनोदानंदसिंह के साथ कई कार्यक्रमों में और व्यक्तिगत तौर पर हुई। किशनजी से प्रभावित होकर सुनील भाई जेएनयू की पढ़ाई समाप्त होने के बाद केसला आ गए, जहां उन्होंने अपना पूरा जीवन खपा दिया। वे भी एक समय में समाजवादी जन परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने।  किशनजी ने जब मनमोहन सिंह और नरसिम्हा राव द्वारा देश को विश्व बैंक और आर्थिक मुद्रा कोष की खुली अर्थव्यवस्था की नीतियों के तहत खोल दिया, वैश्वीकरण, उदारीकरण और निजीकरण को विकास का एकमात्र मूल मंत्र बताया जाने लगा, तब किशन पटनायक ने देश भर के जन संगठनों, समाजवादी संगठनों और अन्य प्रगतिशील संगठनों के साथ मिलकर राष्ट्रव्यापी संघर्ष छेड़ा। उस समय ‘देयर इज नो अल्टरनेटिव’ (TINA) की बात सिद्धांत के तौर पर कही जाती थी। तब उन्होंने उसे चुनौती देते हुए लिखा की ‘विकल्पहींन नहीं है दुनिया’ । किशनजी सामयिक वार्ता पत्रिका भी प्रकाशित करते थे, जो आज भी उनके साथी निकाल रहे  हैं।

See also  1 व 2 अप्रैल को होशंगाबाद में होगा NAPM जन आंदोलनों के राष्ट्रीय सम्मेलन में विकास की अवधारणा पर विमर्श

किशन पटनायक के बारे में मुझे उनकी पत्नी वाणी से लॉकडाउन के दौरान गत 4 महीनों में काफी कुछ जानने को मिला। वाणीजी पुणे किसी कार्यक्रम में गई थी। लॉकडाउन के लगभग 3 महीने वहीं फंसी रही । तब मैं वाणीजी से बीच-बीच में कुशलता के समाचार लेता रहा। वाणीजी संगीतज्ञ रही है और किशनजी राजनीतिज्ञ। वे केंद्रीय विद्यालय रांची, बंगलुरु बड़नाल और भुवनेश्वर में 1979 से 2011 तक नौकरी की। हाल ही में (30 जून को) किशन पटनायक के जन्‍म दिवस पर उनकी पत्‍नी वाणी से राजनीति से हटकर किशनजी के व्‍यक्तित्‍व /कृतित्‍व के बारे में मैंने चर्चा की। मेरे आग्रह पर वाणीजी ने अपने व्‍यक्तिगत जीवन से जुडे कुछ किस्से सुनाए तो कुछ किशन पटनायकजी की कार्य पद्धति के।

वाणीजी बताती है कि वे केंद्रीय विद्यालय में नौकरी करती थी और  किशनजी राजनीति । हमारी बीच-बीच में कई बार मुलाकातें होती थीं। उन्‍होंने एक बार किशनजी से कहा कि आप तो देश भर में घूमते हो, लेकिन मेरे लिए कुछ नहीं लाते। हम उस वक्‍त घर के बाहर खड़े थे। उन्होंने कहा कि तुम चाहती हो कि मैं साड़ी लाऊं। तब ही घर के सामने से कोई महिला गुजर रही थी (शायद वह किसी के घर में काम करने वाली महिला थी)। किशनजी बोले तुम अपना कपड़ा देखो और उसका कपड़ा देखो। तुम्हारा कपड़ा इतना अच्छा है, तुम कितनी अच्छी लगती हो। मैं समझ गई कि वह मुझे सिखा रहे थे कि तुम्हारे पास जो है, वह औरों से अच्छा है। तुम्हें और अधिक पाने की (इकट्ठा) इच्छा नहीं रखनी चाहिए।

See also  1 से 7 जून 2023 तक नदी बचाओ- पर्यावरण बचाओ संघर्ष सप्ताह का आह्वान

ज्‍यादा पाने की इच्छा नहीं रखनी चाहिए

वाणी जी ने एक और किस्‍सा सुनाते हुए कहा कि अंतिम बार जब किशनजी हैदराबाद की यात्रा के लिए निकले थे, तब जाते समय उन्होंने पूछा कि तुम्हारी नौकरी खत्म हो जाएगी, तब तुम क्या करोगी ? मैंने उस समय कोई जवाब नहीं दिया क्योंकि मुझे मालूम था कि वे जानते थे कि मैं अकेली रह सकती हूं, अकेली चल सकती हूं। (यह बात लॉकडाउन के समय मुझे समझ में आई जब 69  वर्ष की उम्र में भी खुद को संभाल सकी।) 

औरत को ज्यादा दबाकर रखा जाता है तब औरत की हिम्मत बहुत बढ़ जाती है

आगे चर्चा के दौरान मैंने उनकी शादी के बारे में जानना चाहा। उन्होंने बताया कि आमतौर पर लोग मानते हैं कि मैं ओडिसा की थीं, इसलिए उनके साथ विवाह  हो गया होगा। लेकिन किशनजी का जन्मस्‍थान उड़ीसा के भवानीपटना था और मेरा जन्मस्थान बालासोर था। इन दोनों जिलों में लंबी दूरी थी। वाणी जी ने विवाह का प्रसंग का जिक्र करते हुए कहा कि  वे 12 वर्षों तक साने गुरुजी ,यदुनाथ थत्‍ते, एसएम जोशी तथा तिलकजी के बड़े दामाद जीडी केतकर के साथ पुणें में रहीं। मेरा जन्म तो उड़ीसा में हुआ। बचपन से गाना गाती थी, फिर संगीत की पढ़ाई की। विनायकराव पटवर्धन के यहाँ संगीत सीखने आ गयी। पुणे में वे जहां रहती थी, वह घर साधना प्रकाशन के पास था। साने गुरूजी और यदुनाथ थत्‍ते की वहीं बैठक थी। उन्होंने नई लड़की देखकर, पढ़ने-लिखने के काम से जोड़ा लिया। साधना प्रकाशन के कार्यालय में कोई बैंक के अधिकारी आते थे, जिनका बरगढ़ से संबंध था, वह मेरे पिताजी के भी दोस्त थे। एक दिन उन्होंने मुझसे कहा कि क्या तुम बरगढ़ के लड़के के साथ शादी करोगी?  फिर किशनजी के बारे में बताते हुए कहा कि ऐसा फक्कड़ आदमी है कि एक चप्पल होती है, दूसरी नहीं। वाणीजी ने हंसकर बताया कि मैंने उनसे कहा कि क्या दूसरी चप्पल ढूंढने आप मेरी शादी उनसे कराना चाहते हैं? बात आई-गई हो गई। मैं भाई बहनों को पढ़ाने में व्यस्त थी। वे जब बरगढ़ गए, तब किशनजी को मेरे बारे में बताया। किशनजी ने मुझे चिट्ठी लिखी। मैंने डेढ़ महीने तक उस चिट्ठी का जवाब नहीं दिया। चिट्ठी में उन्होंने लिखा था कि औरत को जब ज्यादा दबाकर रखा जाता है तब औरत की हिम्मत बहुत बढ़ जाती है।

See also  कोशी-मेची नदी जोड़ परियोजना पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग

बिना तामझाम के शादी

आगे वे कहती है कि बाद में मुंबई के भारती विद्या भवन में काम करने लगी। पहले पुणे में व्ही. शांताराम के प्रभात स्टूडियो में गाने जाती थी, वहां पर एक म्यूजिक डायरेक्टर थापाजी, जो दिल्ली चले गए थे, के बुलाने पर मैं दिल्ली गई। दिल्ली के भारतीय कला केंद्र में स्कॉलरशिप मिल गई। फिर थापाजी ने मुझसे कहा कि किशन से बात करोगी, उन्होंने फोन लगा दिया। उनसे कहा कि वाणी से मिलने आओ। किशनजी ने कहा कि वक्त नहीं है लेकिन अगले दिन वह आए,  लेकिन मैं घर पर नहीं थी। वह चिट्ठी छोड़कर गए, बाद में हमारी मुलाकात होने लगी। सब चाहते थे कि हम शादी कर ले लेकिन हम लंबे समय तक बिना शादी किए मिलते – जुलते रहे। बाद में 11 जून 1969 में हमने बिना तामझाम के शादी की।

राजनेता और आम आदमी में कोई फर्क नहीं

वाणीजी ने समाजवादी नेता  राजनारायण, जिन्होंने इंदिरा गांधी को चुनाव में पराजित किया था,  से जुड़े किस्से भी सुनाए। भूपेंद्र नारायण मंडल  सहरसा बिहार के थे तथा राज्यसभा सदस्य थे। साउथ एवेन्यू में रहते थे। उनके सर्वेंट क्वार्टर में किशनजी रहते थे। बस स्टैंड पर  जब कभी  वाणीजी दोपहर में  बस से उतरती थी, तब राजनारायण उन्हें  खाने के लिए बुलाते थे तथा हाथ से बनाकर खिलाते थे।

एक बार आंदोलन में लाठीचार्ज हुआ राजनारायणजी का पैर टूट गया, किशनजी के हाथ का फैक्चर हुआ। एक दिन वाणीजी ने राजनारायणजी से कहा कि आप बड़े नेता हो इसलिए आप का इलाज एम्स के  हड्डी विशेषज्ञ डॉक्टर शंकरन करेंगे और क्योंकि मेरे पति गरीब है, उनका इलाज कोई साधारण डॉक्टर करेगा ? राजनारायणजी ने तुरंत एम्स में डॉक्टर शंकरन से उनके भी इलाज की व्यवस्था कराई।

किशन पटनायक का देहांत 27 सितंबर 2004 को हो गया। पिछले 16 वर्षों से  वाणीजी भुवनेश्वर में  अकेले रहती है। वहां भी उनकी पूरी सक्रियता बनी हुई है। आजकल देश भर में भ्रमण करती रहती हैं । मुलाकात हो बात हो, उनकी यादाश्त की प्रशंसा किये बिना नहीं रहता। परन्तु  कभी किसी की शिकायत नहीं, किसी से कोई उम्मीद नहीं, महसूस  होता है वाणीजी मन से आनंद  में हैं। उनकी जीवटता, बेबकीपन को सलाम। स्वास्थ्य रहने और दीर्घायु होने की शुभकामनाएं !

(डॉ. सुनीलम मध्यप्रदेश के पूर्व विधायक हैं और मौजूदा समय में समाजवादी समागम के महामंत्री हैं।)

Table of Contents

सागर से अंतरिक्ष तक : रक्षा विमर्श को नई दिशा देती शोधपरक कृति

भारत की सुरक्षा, संप्रभुता और वैश्विक प्रतिष्ठा से जुड़ा रक्षा विमर्श केवल सैन्य शक्ति का वर्णन नहीं, बल्कि राष्ट्र की सामरिक चेतना का दर्पण होता है। ऐसे समय में वरिष्ठ पत्रकार योगेश कुमार गोयल की पुस्तक ‘सागर से अंतरिक्ष तक:

Read More »

अपने जैसा ‘एआई’

‘आर्टीफीशियल इंटेलीजेंस’ उर्फ ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ के कसीदे बांचते हुए हम अक्सर इस मामूली सी बात को भूल जाते हैं कि ‘एआई’ आखिरकार एक व्यक्ति और समाज की तरह हमारा ही प्रतिरूप है। यानि हम उस मशीन में जैसा और जितना

Read More »

मध्यप्रदेश का बजट : ग्रीन फ्रेमवर्क का दावा, जलवायु संकट की अनदेखी

हाल के मध्यप्रदेश के बजट में तरह-तरह की लोक-लुभावन घोषणाओं के बावजूद पर्यावरण-प्रदूषण से निपटने की कोई तजबीज जाहिर नहीं हुई है। यहां तक कि पर्यावरण के लिए आवंटित राशि भी पिछले साल के मुकाबले घटा दी गई है। आखिर

Read More »