नई दिल्ली में कोप 30 की तैयारी बैठक में राजेंद्र सिंह और कैलाश सत्यार्थी समेत कई गणमान्य व्यक्तियों की सहभागिता
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में 1 सितंबर 2025 को ब्राजील कोप 30 (COP30) की तैयारी बैठक आयोजित हुई। इसमें भारत और ब्राजील के प्रतिनिधियों के साथ कई अन्य देशों और संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी, ब्राजील के एम्बेसडर और कोप 30 आयोजन समिति की अध्यक्ष मंत्री मरिना सिल्वा की उपस्थिति विशेष रही।
इस अवसर पर पर्यावरणविद और रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित राजेंद्र सिंह ने कहा कि भारत और ब्राजील दोनों ही प्राकृतिक और सांस्कृतिक रूप से गहरे संबंध साझा करते हैं। जिस प्रकार भारत में प्रकृति को भगवान के रूप में मानने की परंपरा रही है, उसी तरह ब्राजील की संस्कृति में भी प्रकृति और पर्यावरण के प्रति गहरी आस्था है। यही साझा दृष्टिकोण दोनों देशों को एक नए स्तर पर जोड़ सकता है।
स्थानीय समुदायों की आवाज़ को मिले महत्व

राजेंद्र सिंह ने कहा कि यदि ब्राजील और भारत मिलकर इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हैं, तो कोप जैसे मंच केवल औपचारिक आयोजन नहीं रहेंगे, बल्कि उनमें जीवन और वास्तविक नयापन का स्पर्श होगा। उन्होंने जोर दिया कि ब्राजील को “विज़डम कीपर” यानी अनुभव और परंपराओं के संरक्षक की भूमिका निभानी होगी। अगर स्थानीय समुदायों और प्रैक्टिसनर्स की आवाज़ सुनी जाएगी, तो यह प्रक्रिया केवल तकनीकी या राजनीतिक नहीं रहेगी, बल्कि एक नैतिक और न्यायपूर्ण दिशा में भी आगे बढ़ सकेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में निर्णय लेने की प्रक्रिया न्यायपूर्ण नहीं है। कोप जैसी वैश्विक बैठकों में अक्सर जल, जंगल और जमीन से जुड़े समुदायों की आवाज़ दब जाती है। अमेरिका जैसे देश, जो जलवायु संकट के सबसे बड़े कारण रहे हैं, आज भी इसके अस्तित्व को मानने से कतराते हैं, और दुनिया को उनकी राह पर चलने को मजबूर होना पड़ता है। इस अन्यायपूर्ण स्थिति को बदलना होगा।
भारत और ब्राजील : साझा सांस्कृतिक आधार
राजेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि जलवायु परिवर्तन से सबसे अधिक प्रभावित समाजों और प्रकृति से गहरे रिश्ते रखने वाले समुदायों की आवाज़ को ही असली महत्व मिलना चाहिए। जब मनुष्य प्रकृति को भगवान मानकर उसका सम्मान और प्रेम से व्यवहार करेगा, तभी सच्चा जलवायु न्याय संभव होगा।
उन्होंने कहा कि ब्राजील दुनिया के सबसे बड़े जंगल अमेज़न का संरक्षक है, वहीं भारत हिमालय की हरियाली और गंगा की पवित्रता का संवाहक है। यह साझा दृष्टिकोण दोनों देशों को वैश्विक स्तर पर एक नई प्रक्रिया की ओर ले जा सकता है। यदि भारत और ब्राजील मिलकर कदम उठाते हैं, तो यह न केवल दोनों देशों बल्कि पूरी दुनिया के लिए प्रेरक साबित होगा।
रूस का दृष्टिकोण
बैठक में रूस के प्रतिनिधियों ने कहा कि भारत और ब्राजील दोनों ही समुदाय और प्रकृति के रिश्ते में विश्वास रखते हैं। इसलिए इस कोप में स्थानीय स्तर पर विकेंद्रीकृत प्राकृतिक प्रबंधन और संरक्षण को महत्व दिया जाना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि इस कोप के एग्रीमेंट में सामुदायिक प्रबंधन को बढ़ावा मिलना चाहिए।
वैश्विक सहयोग की दिशा में कदम
बैठक में उपस्थित अन्य प्रतिनिधियों और संगठनों ने भी इस विचार का समर्थन किया कि जब तक प्रकृति के प्रति सम्मान, न्यायपूर्ण नीति और स्थानीय समुदायों की सहभागिता सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक जलवायु संकट का समाधान संभव नहीं है।
भारत और ब्राजील मिलकर इस दिशा में दुनिया के सामने एक मिसाल पेश कर सकते हैं। इससे एक नए युग की शुरुआत हो सकती है, जिसमें प्रकृति और मनुष्य का रिश्ता संतुलित और संवेदनशील बन सकेगा।


