वन्‍य जीव एवं जैव विविधता

पेड़-पौधों की सौगात है, प्राणवायु

कोविड-19 महामारी ने हमारे आसपास अपने गंधहीन, रंगहीन स्वरूप में मौजूद तत्व ऑक्सीजन की अहमियत उजागर कर दी है। यह ऑक्सीजन या प्राणवायु प्रकृति के जिस खजाने से मिलती है, उसकी हम कितनी परवाह करते हैं? क्या हम खुद अपने…

बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण जैव विविधता के लिए हानिकारक : वैश्विक जैव विविधता पैनल

‘‘मानव की हानिकारक गतिविधियों के कारण कुदरत और लोगों के प्रति उसके योगदान पर खतरा लगातार बढ़ रहा है। इसमें जलवायु परिवर्तन के असर को कम करने की उसकी क्षमता भी शामिल है। धरती जितनी गर्म होती जाएगी, विभिन्‍न क्षेत्रों…

Baxwaha: प्राकृतिक संसाधन की लूट और विरोध के बीच पिसता ग्रामीण समाज

बक्सवाहा (Baxwaha) में हीरा खनन की सरकारी कोशिशों और नागरिकों के विरोध पर तदर्थ कमेटी की रिपोर्ट मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में बक्सवाहा का नाम इन दिनों सरकार, कारपोरेट, सामाजिक संगठन और पर्यावरण प्रेमियों की जुबान पर है। वजह…

फिर गूंजी ट्विटर पर डुमना के लिए पर्यावरण प्रेमियों की आवाज़

सोशल मीडिया में ट्रेंड कर रहा # Leave Dumna Alone जबलपुर, 26 जून 2021 मध्य प्रदेश में पर्यावरण को बचाने की बड़ी पहल शुरू हो गई है। जबलपुर में बक्स्वाहा की तर्ज पर आंदोलन हेतु लोग लामबंद होने लगे है।।…

Tiger : अपने ही बसेरों में बेहाल बाघ

वन्‍य प्राणी आधुनिक, ‘वैज्ञानिक वानिकी’ में पारंगत हमारे वन विभागों के मंहगे अमले के बावजूद वन और उसमें बसे वन्यप्राणी बच नहीं पा रहे हैं। इस मौजूदा तौर-तरीके में पीढियों से वनों और वन्यप्राणियों के साथ सहजीवन जीते आदिवासियों को…

हीरे की हवस में कटते बुंदेलखंड के जंगल

पिछले कुछ सालों से लगातार सूखे की मार झेलते बुंदेलखंड में अब पानी देने वाले जंगलों पर खतरा मंडराने लगा है। यह खतरा समाज के बेहद छोटे, ऊपरी अमीर तबके की हीरे की हवस के रूप में आया है। कहा…

23 May World Turtle Day: अस्तित्‍व के संकट से जूझते कछुये

हर साल 23 मई को विश्व कछुआ दिवस (World Turtle Day) के रूप में मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य कछुओं और दुनिया भर में उनके तेजी से गायब होते आवासों की रक्षा करना है। यह दिवस 2000 में American Tortoise…

खतरे में पड़ी जैव विविधता

22 मई जैव विविधता दिवस पर विशेष जैव विविधता की दृष्टि से भारत विश्व के समृद्धतम राष्ट्रों में प्रमुख है। भारत की विशिष्ट भौगोलिक स्थिति होने के कारण पशु-पक्षियों एवं पेड़-पौधों को जितनी अधिक प्रजातियों पाई जाती हैं, उतनी विश्व…

वायरस से बचने के लिए जैव-विविधता

कोरोना वायरस की भीषण चपेट में फंसी दुनिया को आखिर इससे किस तरह निजात मिल सकेगी? साफ दिखाई देता है कि इस तरह के अनेक संकटों से बचने के लिए हमें ‘कोरोना बाद’ की ऐसी बदली हुई दुनिया के बारे…

सिर्फ रौंदने के लिए नहीं है – घास

दिन-प्रतिदिन घास पर संकट और गहराता जा रहा है। इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं पशु जगत। मनुष्य जगत भी अब प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होने लगा है। खाद्य सुरक्षा के लिए भी घास का जीवित रहना तथा खाद्य-श्रंखला…