Sarvodaya Press Service

सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक

वन्‍य जीव एवं जैव विविधता

खतरे में पड़ी जैव विविधता

22 मई जैव विविधता दिवस पर विशेष जैव विविधता की दृष्टि से भारत विश्व के समृद्धतम राष्ट्रों में प्रमुख है। भारत की विशिष्ट भौगोलिक स्थिति होने के कारण पशु-पक्षियों एवं पेड़-पौधों को जितनी अधिक प्रजातियों पाई जाती हैं, उतनी विश्व…

वायरस से बचने के लिए जैव-विविधता

कोरोना वायरस की भीषण चपेट में फंसी दुनिया को आखिर इससे किस तरह निजात मिल सकेगी? साफ दिखाई देता है कि इस तरह के अनेक संकटों से बचने के लिए हमें ‘कोरोना बाद’ की ऐसी बदली हुई दुनिया के बारे…

सिर्फ रौंदने के लिए नहीं है – घास

दिन-प्रतिदिन घास पर संकट और गहराता जा रहा है। इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं पशु जगत। मनुष्य जगत भी अब प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होने लगा है। खाद्य सुरक्षा के लिए भी घास का जीवित रहना तथा खाद्य-श्रंखला…

कोविड पर कारगर पेड़-पौधे

पेड़-पौधे पर्यावरण को दुरुस्‍त रखने के अलावा हमारे इलाज के लिए दवाएं भी मुहैय्या करवाते हैं। इन दिनों दुनिया-जहान को हलाकान करने वाली कोविड-19 बीमारी भी इसमें शामिल है। अब ऐसे अनेक उदाहरण सामने आ गए हैं जिनसे कोविड के…

एक गांव ऐसा भी है जहां सिर्फ पक्षियों की पूछ-परख होती है

जलसंकट और रेगिस्तानों के लिए प्रसिद्ध हमारे राजस्थान में एक गांव ऐसा भी है जहां सिर्फ पक्षियों की पूछ-परख होती है। उदयपुर के पास मेनार गांव में विकास की हर योजना पक्षियों की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई और…

“हाथी” क्यों ना रहा “साथी” ?

विश्व हाथी दिवस 12 अगस्त पर विशेष हाथियों की रक्षा और सम्मान करने और उनके सामने आने वाले खतरों के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्‍य से हर साल 12 अगस्त को विश्व हाथी दिवस मनाया जाता है। हाथी…

‘देख लो आज हमको जी भर के, कोई आता नहीं फिर मर के’

अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस (29 जुलाई) पर ‘बाघ’  के बहाने शेरखान ‘शेर’ का विशेष साक्षात्‍कार अवनीश सोमकुंवर भारत में फिलहाल पूरी दुनिया की कुल बाघों की आबादी का 70 प्रतिशत है। देश में अभी 30,000 हाथी, 3000 एक सींग वाले गैंडे…

जरूरी है, जैव-विविधता का जीवन

जैव-विविधता इंसानों समेत समूची सचराचर धरती के विकास में अहमियत रखती है, लेकिन उसे इंसानों से ही सर्वाधिक खतरा भी है। अपनी खाऊ-उडाऊ विकास पद्धति पर अटूट भरोसा करने वाला इंसान यह तक भूलता जा रहा है कि जैव-विविधता की…

प्रकृति के प्रति लापरवाही का नतीजा

मुकुट यानि क्राउन के आकार के कोरोना वायरस ने अपनी बीमारी कोविड-19 की मार्फत समूची दुनिया को हलाकान कर दिया है। इसकी उत्‍पत्ति की कई वजहें गिनाई जा रही हैं, लेकिन उन सबका जोड आधुनिक विकास के लिए प्रकृति से…

आज भी बरकरार हैं, देवताओं के ‘पवित्र-वन’

वन और वन्य-प्राणियों के संरक्षण-संवर्धन में लगी कथित ‘वैज्ञानिक वानिकी’ के हल्ले में हम अपनी उन परम्पराओं को भूलते जा रहे हैं जिनकी बदौलत हमारे पास आज भी वन और वन्यप्राणी सम्पदा बची हुई है। भारी-भरकम किताबी ज्ञान की टक्कर…