ताजा आलेख

क्या तनिष्क विवाद के बाद भी दोहराई जाएगी ‘विवेक’ कथा ?

चिंता इस बात की नहीं है कि एक पारसी मालिक के आधिपत्य वाली कम्पनी द्वारा जारी विज्ञापन का इतने आक्रामक तरीक़े से विरोध किया गया ( गांधीधाम, गुजरात में तो धमकियों के बाद ‘तनिष्क’ के एक शोरूम के बाहर एक…

खोट गांधी की प्रासंगिकता में नहीं, हमारे साहस में है !

महात्‍मा गांधी : 150वां जयंती वर्ष   गांधी की ज़रूरत के प्रति एक ईमानदार अभिव्यक्ति की पहली शर्त ही यही है कि हम इन हिंसक आत्मघाती दस्तों का अहिंसक और शांतिपूर्ण तरीक़ों से प्रतिकार करने के लिए अपने शरीरों के…

कि उन्हें मिलने वाली नहीं है नौकरी

मौजूदा स्थितियां बता रही हैं कि अगर बेकारी एक समृद्ध अर्थव्यवस्था में आएगी तो लोगों के पास समय रहेगा और वे अपने समुदाय की सेवा और भलाई पर ध्यान देंगे। बच्चों और बूढ़ों की देखभाल करेंगे और अच्छा साहित्य और…

अस्तित्व के लिए जूझती नदी

पुस्तक समीक्षा पिछले दिनों ‘नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण’ में लम्‍बे समय जनसंपर्क अधिकारी रहे आदिल खान की ‘सरदार सरोवर परियोजना’ और उसका विरोध कर रहे ‘नर्मदा बचाओ आंदेालन’ के इतिहास पर एक किताब आई है। प्रस्‍तुत है, इस किताब की…

बेदखली की चपेट में दिल्‍ली के झुग्‍गीवासी

हाल में सुप्रीमकोर्ट के निर्देश पर दिल्‍ली में झुग्‍गी बस्तियों के 48 हजार परिवारों को अपनी जमीन से हटाने की रेलवे की पहल पर सरकार ने रोक लगा दी है। दिल्‍ली और देशभर में खलबली मचाने और गरीबों के आशियानों…

संस्कृत के मोह में रुक गया हिंदी का विकास

हिंदी को संस्कृत निष्ठ बनाने का सिलसिला थमा नहीं है और न ही हिंदी को सांप्रदायिकता की जुबान बनाने की कोशिश ठहरी है। तमाम गैर हिंदी भाषी राजनेता सीखी हुई हिंदी बोलते हैं और बड़े जनसमुदाय को प्रभावित करते हैं।…

हिन्‍दी की हैसियत

हिन्‍दी दिवस (14 सितम्‍बर)  भाषा हमारे जीवन की एक बुनियादी जरूरत है, लेकिन आजकल उसमें भी भेद-भाव बरता जा रहा है। ऐसे में मातृभाषा हिन्‍दी को किस तरह कारगर बनाया जाए? प्रस्‍तुत है, इसी विषय पर प्रकाश डालता विभा वत्‍सल का…

बाढ़-नियंत्रण की बजाए बाढ़ की वजह बनता, सरदार सरोवर बाँध

बड़े बांधों के घोषित उद्देश्‍यों में जल-विद्युत और सिंचाई के बलावा बाढ़-नियंत्रण भी शामिल है, लेकिन देशभर में कहीं बांधों से बाढ़ को नियंत्रित करने का कोई ठोस उदाहरण सामने नहीं आया है। मध्‍यप्रदेश में जहां नर्मदा और उसकी सहायक…

कोरोना पर भी भारी पड़ गई कंगना !

देश का पूरा ध्यान एक अभूतपूर्व संकट से सफलतापूर्वक भटका दिया गया है। चालीस सालों में पहली बार इतना बड़ा आर्थिक संकट, करोड़ों लोगों की बेरोज़गारी, महामारी से प्रतिदिन संक्रमित होने वालों के आँकड़ों में दुनिया में नम्बर वन बन…

विकरालता से निपटने के ‘विकेन्द्रित’ तरीके

सवाल है कि क्‍या आज की बदहाली के लिए, खासतौर पर भारत में, लघु और विशाल के बीच का द्वंद्व ही जिम्‍मेदार है? क्‍या आजादी के बाद गांधी के लघु और उपयुक्‍त को नजरअंदाज कर बनाई गई ‘बिगेस्‍ट इन द…