पाखंड की परम्परा
क्या वे अपने जैसे नर्मदा तट के उन लाखों रहवासियों के बारे में कभी सोच पाते हैं जिन्हें बड़े बांधों के नाम पर अपने-अपने घर-बार से जबरन खदेड़ दिया गया है और जिनके पुनर्वास के बारे में विचार तक करना…
‘आंदोलनजीवियों’ की अनदेखी के नतीजे
हमारे समय का सर्वाधिक विवादास्पद शब्द ‘विकास’ है और इसके प्रभाव में अधिकांश देशवासी कराह रहे हैं, लेकिन इसे लेकर किसी राजनीतिक मंच पर गहराई से विचार-विमर्श नहीं होता। उलटे मौजूदा विकास की अवधारणा को लेकर सभी राजनीतिक पार्टियां एकमत…
इस आंदोलन का “महात्मा गांधी” कौन है ?
छह महीने के राशन-पानी और चालित चोके-चक्की की तैयारी के साथ राजधानी दिल्ली की सीमाओं पर पहुँचे किसान अपने धैर्य की पहली सरकारी परीक्षा में ही असफल हो गए हैं ,क्या ऐसा मान लिया जाए ? जाँचें अब उनके सत्तर…
शहरी मध्यवर्ग की बेतुकी मान्यताएं
किसान आंदोलन पर भी शिद्दत और नासमझी से सवाल उठाया गया है कि लाखों लोगों के भोजन (लंगर) और दूसरी व्यवस्थाओं का इंतजाम आखिर कैसे और कौन कर रहा है? कुछ अधिक ‘कल्पनाशील’ शहरी इसमें कनाडा, इंग्लेंड, अमरीका और वहां…
किसान आंदोलन : एक बार फिर बकासुर
वैसे देखा जाए तो बकासुर की यह कथा विज्ञान और तकनीक पर न्यौछावर विद्वानों से लेकर अहर्निश भक्तिभाव में डूबे धर्म-प्राणों तक सभी में कमोबेश मौजूद रहती है। सभी को लगता है कि संकट या समस्या का एकमात्र इलाज केवल…
संभव है, नए कृषि कानूनों की वापसी
कडकती सर्दी में धरना देते किसानों को महीना भर से ऊपर हो गया है, लेकिन उनके संघर्ष का कोई हल निकलता दिखाई नहीं देता। किसानों की मांग है कि नए कृषि कानूनों को खारिज किया जाए और सरकार इसके लिए…
‘अभया’ और ‘निर्भया’ के अर्थ भी समान हैं और व्यथाएँ भी !
डेढ़ करोड़ की आबादी वाले कैथोलिक समाज में पादरियों और ननों की संख्या डेढ़ लाख से अधिक है। कोई पचास हज़ार पादरी हैं और बाक़ी नन्स हैं। ऊपरी तौर पर साफ़-सुथरे और महान दिखने वाले चर्च के साम्राज्य में कई…
किसानों के विरोध की विरासत
कडकती सर्दी में डेढ-दो हफ्तों से दिल्ली में धरना दिए बैठे देशभर के किसानों के ‘जीने-मरने’ की इस लडाई को पंजाब-हरियाणा के किसानों का नेतृत्व मिला है। सवाल है कि क्या पंजाब-हरियाणा के किसानों को उनके इतिहास से कोई प्रेरणा…
किसान भारत की आत्मा है, उसे सम्मान दें
किसान और सरकार वार्ता के छः दौर पूरे हुए है। सीधी मामूली माँग है। किसान विरोधी जो तीन कानून अलोकतांत्रिक तरीके से बनाये है, उन्हें जल्दी से जल्दी रद्द करो। इस मांग के ऊपर ज्यादा संवाद या वार्ता में समय…
जिनके बिना आज का भारत न होता
31 अक्टूबर : सरदार पटेल की 145वीं जयंती भारत छोड़ो आंदोलन में अनेक राष्ट्रभक्तों ने अपने अपने ढंग से इस पवित्र यज्ञ में अपनी आहुति दी थी। इनमें सरदार वल्लभभाई पटेल ऐसा नाम है,जिसने गोरी हुक़ूमत को अपने तेवरों से…









