जल, जंगल, जमीन

मेघालय के पर्यावरण को कोयला खनन से खतरा

उत्तर-पूर्व का राज्य मेघालय एक जमाने में अपनी खूबसूरती और भारी वर्षा के कारण विख्यात था, लेकिन अब, दुनिया के ऐसे ही दूसरे इलाकों की तरह, खनन, जल-विद्युत परियोजनाओं और कथित विकास की चपेट में आकर बर्बाद होता जा रहा…

‘विकास’ की बलि चढ़ता हिमालय

उत्तराखंड की ताजा त्रासदी ने एक बार फिर उस सनातन सवाल को उछाल दिया है कि आखिर विकास के नाम पर होने वाली गतिविधियां हमारे विनाश की वजह क्यों बनती जा रहीं हैं? क्या उत्तराखंड में बनी और बन रहीं…

भारी पड़ेगी , भूजल की अनदेखी

कृषि और औद्योगिक उत्‍पादन में बढौतरी ने हमारे जल-संसाधनों पर भारी संकट खड़ा कर दिया है। नतीजे में धीरे-धीरे हजारों साल में बना भूगर्भीय जल भंडार सूखता जा रहा है। इससे कैसे निपटा जाए? जब से हमारे देश में कुंओं, बावडियों…

कोविड में कितनी साफ रहीं, गंगा?

आंकडे बताते हैं कि कोविड-19 महामारी के दौर में लगे लॉकडाउन में गंगा और यमुना सरीखी उसकी सहायक नदियां निर्मल हो गई थीं। इस भुलावे में रहकर कि महामारी के चलते गंगा साफ हो जायेगी, यह सवाल नागरिकों के जिन्दा…

नर्मदा रेत खनन : जनता के साथ जलवायु का कबाड़ा

इमारतों के निर्माण में रेत यानि सिलिका बहुत अहम भूमिका निभाती है, लेकिन क्‍या ‘जीडीपी’ में सर्वाधिक योगदान करने वाली इस गतिविधि को आम लोगों और उनके साथ पर्यावरण को उजाडने की छूट दी जा सकती है? इन दिनों मध्‍यप्रदेश,…

व्‍यवसाय के लिए वन

आधुनिक व्‍यापार-व्‍यवसाय ने अब तेजी से प्राकृतिक संसाधनों को अपनी चपेट में लेना शुरु कर दिया है। जंगल, जिन्‍हें सुप्रीमकोर्ट द्वारा दी गई परिभाषा के मुताबिक केवल रिकॉर्ड में जंगल की तरह दर्ज होना ही काफी है, निजी कंपनियों को…

गंगत्व बचाने का काम लोकतंत्र में ‘लोक राजनीति’ से ही सम्भव

गंगा को अब लोक राजनीति से ही बचा सकते हैं। यह लोक राजनीति के लिए सर्वश्रेष्ठ समय है। इस हेतु सभी अपनी निजी पहचान भूलकर एकाकर संगठित होकर लोक राजनीति में जुटें। गंगत्व बचाने का काम लोकतन्त्र में लोक राजनीति…

जरा से आंधी-पानी में क्यों उखड़ जाते हैं पेड़

मामूली आंधी-पानी में किसी भी आकार-प्रकार के शहरों के बाढ-ग्रस्‍त होने के अलावा तडा-तड गिरते पेड आजकल बडी समस्‍या बन गए हैं। हर बरसात में गाडी, मकान और इंसानों पर गिरे पेडों का दृश्‍य आजकल आम है। क्‍यों होता है,…

हिमालय: “विकास” याने पागल दौड़

इन दिनों देश में विकास का प्रकृति, पर्यावरण के साथ जबरदस्त संघर्ष चल रहा है। मानो एक युद्ध ही अनवरत चल रहा हो। आज की इन परिस्थितियों में ’विकास’ हमारी दुनिया का सबसे अधिक भ्रमपूर्ण शब्द बन गया है। आँखों…

तूफानी तबाही से बचा सकते हैं, पेड़

हाल के वर्षों में समुद्री तूफानों ने हमारे तटीय राज्यों में भारी तबाही मचाई है। इन्हीं दिनों पश्चिमी तट के केरल, महाराष्ट्र, गोवा और गुजरात राज्य तूफान ‘वायु’ से उलझ रहे हैं। जलवायु परिवर्तन की मार से उपजे इन विचित्र…