वैश्विक पर्यावरण

ऊर्जा : सौर से सस्ती होगी बिजली

भले ही दो दिन बाद सर्वशक्तिमान माने जाने वाले अमरीका का राजपाट एक ऐसे व्यक्ति के हाथों में आ जाए जिसे जलवायु परिवर्तन पर हुआ ‘पेरिस समझौता’ जरा भी नहीं सुहाता, लेकिन लगातार बढ़ता तापक्रम ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों की…

सुप्रीम कोर्ट से संवैधानिक अधिकार : मौसम और मजदूरी पर फैसले

आज के समय में जलवायु परिवर्तन और बेरोजगारी के मुद्दे हमारे सामने मुंह बाए खड़े हैं, इनसे निपटने के लिए सुप्रीमकोर्ट के फैसले भी मौजूद हैं, लेकिन किन्हीं अनजानी गफलतों, हितों या भूल जाने की राष्ट्रीय बीमारी के चलते उन्हें…

विकास के नाम पर हम पर्यावरण को संगठित रूप से क्षति पहुंचा रहे, केवल सरकार के भरोसे न रहें

‘झंडा ऊंचा रहे हमारा’ अभियान के तहत संविधान में पर्यावरण पर परिचर्चा इंदौर, 15 जनवरी। पर्यावरण को सरकार की प्राथमिक सूची में शामिल होना चाहिए। देश में हर वर्ष 42 अरब टन कार्बनडाई आक्साईड पैदा हो रही है। इससे बचने …

महासागरों में बढ़ता प्रदूषण 

मुनाफे और उसकी खातिर पर्यावरण को नेस्त-नाबूद करने की इंसानी फितरत ने समुद्रों को भी नहीं छोडा है। धीरे-धीरे समुद्र भी मैले और निर्जीव होते जा रहे हैं। क्या है, इसकी वजहें? हमारी पृथ्वी पर महासागरों का विशेष महत्व है…

हिमालय : वनों की बदहाली

यह जानने के लिए किसी रॉकेट-साइंस की जरूरत नहीं है कि इंसानी वजूद के लिए वन और उनके साथ पर्यावरण का संरक्षण कितना जरूरी है, लेकिन सरकार से लेकर समाज तक का कोई भी तबका इसे अपेक्षित अहमियत देता नहीं…

अंतर्राष्‍ट्रीय : ट्रंप की ताजपोशी से बढ़ेगा धरती का तापक्रम

बीस जनवरी 2025 को होने वाली अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ताजपोशी राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक उथल-पुथल के अलावा पर्यावरण को भी भारी संकट में डाल सकती है। ट्रंप ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी अरुचि पिछले कार्यकाल में ही…

‘माउंटेन्स ऑफ लाइफ’ : पहाड़ों के संरक्षण और जागरूकता का उत्सव

अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय, भोपाल का वार्षिक जलवायु महोत्सव अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय, भोपाल ने अपने वार्षिक जलवायु महोत्सव के तीसरे वर्ष ‘माउंटेन्स ऑफ लाइफ’  का सात दिवसीय महोत्सव जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूकता बढ़ाने और पर्यावरण के साथ लोगों के गहरे…

भोपाल गैसकांड : गैस से बच कर निकले जहरीले सवाल

अनुपम मिश्र यह साल दुनिया की भीषणतम औद्योगिक त्रासदी ‘भोपाल गैसकांड’ की चालीसवीं बरसी का साल है। क्या हुआ था, दो और तीन दिसंबर की दरमियानी रात को? और उसके बाद किस-किस ने, कैसे-कैसे, क्या-क्या किया? ‘सप्रेस’ के दस्तावेजों में…

देश का पिछड़ता पर्यावरण

जिन वन और वन्यप्राणियों को इंसानी हस्तक्षेप से बचाने की खातिर समूची सरकारी ताकत जंगलों में बसे इक्का-दुक्का गांवों को खदेड़ने में लगी है, उन्हीं वनों को दान-दक्षिणा में पूंजीपतियों को सौंपा जा रहा है। क्या इस तरह की मौजूदा…

दिल्‍ली : हर साल सांसों का ये कैसा आपातकाल?

दिल्ली में इन दिनों एक प्रकार से सांसों का आपातकाल सा दिखाई दे रहा है, जहां चारों ओर स्मॉग की चादर छाई दिखती है। स्मॉग की यह चादर कितनी खतरनाक है, इसका अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि…