वैश्विक पर्यावरण

पहाड़ों में आपदा

भौगोलिक रूप से बेहद संवेदनशील माने जाने वाले पहाड़ों में विकास योजनाओं की जिद ने जानलेवा आफतें खड़ी की हैं। नतीजे में पहाड़ और उन पर बसा जीवन लगातार आपदाओं की चपेट में बना रहता है। कमाल यह है कि…

विकास की दौड़ में हरियाली की पुकार : जंगल बचेंगे तभी जीवन बचेगा

तकनीकी प्रगति और आर्थिक विकास की इस दौड़ में एक ऐसी आवाज़ है जिसे बार-बार अनसुना किया जाता है—जंगलों की। ये जंगल, जो सिर्फ पेड़ों का समूह नहीं बल्कि जीवन का आधार हैं, हर दिन विकास की कीमत चुका रहे…

संवेदनहीन विकास और संकट में पृथ्वी का भविष्य

बढ़ते भौतिक विकास की दौड़ में मानव ने प्रकृति के साथ जो खिलवाड़ किया है, उसके दुष्परिणाम अब स्पष्ट दिखने लगे हैं—असामान्य तापमान, बदलता मौसम और प्राकृतिक आपदाएं इसका प्रमाण हैं। ‘विश्व पृथ्वी दिवस’ हमें यह याद दिलाता है कि…

भारत का भू-सांस्कृतिक मानचित्र : संस्कृति और प्रकृति की समरसता का दस्तावेज

भारत की विविध भूमि, जलवायु और सांस्कृतिक पहचान को एक साथ दर्शाने वाला “भारत का भू-सांस्कृतिक मानचित्र” तरुण भारत संघ की एक अभिनव पहल है। यह मानचित्र देश की आत्मा से जुड़ी प्रकृति और संस्कृति के रिश्ते को उजागर करता…

धरती के लिए सोचो, गांवों से शुरू करो – सस्टेनेबिलिटी की सीख

विकसित भारत के लिए सस्टेनेबल इंटर्नशिप विषय पर संगोष्ठी का आयोजन इंदौर, 17 अप्रैल । इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स विभाग में जिम्मी मगिलिगन मेमोरियल सस्टेनेबल डेवलपमेंट सप्ताह के दूसरे दिन “विकसित भारत के लिए सस्टेनेबल…

हुकुमचंद मिल परिसर में पेड़ों की कटाई के विरोध में सड़कों पर उतरे नागरिक: इंदौर में जन चेतना ने बनाई विशाल मानव श्रृंखला

अगर आज पेड़ काट दिए गए, तो कल हमारी साँसे भी कट जाएँगी इंदौर, 13 अप्रैल। इंदौर की पहचान सिर्फ उसकी सफाई या विकास योजनाओं से नहीं, बल्कि उसकी हरियाली और जागरूक नागरिकों से भी है। हाल ही में हुकुमचंद…

केदारनाथ का पैदल मार्ग : कितना सुरक्षित? 

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में 11,968 फीट की ऊंचाई पर बसा केदारनाथ मंदिर शीतकाल में 6 महीने बंद रहने के बाद अब 2 मई को फिर से खुलने वाला है। चारधाम यात्रा के इस हिस्से में लाखों श्रद्धालु आते हैं,…

जल संरक्षण से कल सुरक्षित होगा

देश का 70 फीसदी भूजल स्रोत सूख चुके हैं और पुनर्भरण की दर 10 फीसदी से भी कम रह गई है। चेन्नई, बेंगलुरु जैसे शहर पानी की कमी को लेकर खबरों की सुर्खियों में है। इसलिए पीने योग्य पानी सभी…

World Water Day : सूने हैं पनघट और प्यासे हैं पोखर-ताल

विश्‍व जल दिवस के अवसर पर प्रत्येक वर्ष संयुक्त राष्ट्र द्वारा एक विश्व जल विकास रिपोर्ट जारी की जाती है जिसमें विभिन्न देशों में जल के संसाधनों, नागरिकों तक की जल की उपलब्धता, घटते भूजल के स्तर और किए जा…

Climate change : आग से जूझते जंगल

आजकल दुनियाभर में जंगल की आग सचमुच ‘जंगल की आग’ की तरह फैल रही है। सुदूर अमरीका, दक्षिण अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया से लगाकर हमारे उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश तक दावाग्नि की चपेट में आ रहे हैं। कैसे निपटें इस संकट से? दुनिया…