इंदौर, 16 फरवरी। देश के वरिष्ठ पत्रकार व चिंतक श्रवण गर्ग ने कहा कि अब हमने बोलना बंद कर दिया है, चुप रहना अपनी आदत बना चुके है। तीर्थस्थलों पर अब पालकी और बैसाखियां बढ़ती जा रही है। वे नहीं…
रोजमर्रा के आमफहम जीवन को फिलहाल छोड भी दें तो महात्मा गांधी की ‘जयन्ती’ और ‘पुण्यतिथि’ की सालाना कवायद पर हम आम लोग कैसा महसूस करते हैं? ‘सप्रेस’ ने यही सवाल अपने एक वरिष्ठ साथी से किया। प्रस्तुत है, अपने…
आजकल लौट-लौटकर यह बात पुख्ता होती जा रही है कि मौजूदा संकटों से निपटने में गांधी की भूमिका अहम हो सकती है। आज के राजनीतिक हालातों को ही देखें तो गांधी की वसीयत से कुछ सुझाव सीखे-समझे जा सकते हैं।…
तुषार बाबू अपने व्यक्तिगत जीवन में गांधी विचार के सच्चे अनुयाई थे। अपने एक रिश्तेदार के घर भोज में दलितों के लिए अलग पंगत की व्यवस्था देख उन्होंने विरोध किया और बात न मानने पर वहां से सपरिवार लौट आये…
देश में बढ़ रही बेरोजगारी के सवाल पर एक बड़े आंदोलन की रूपरेखा तैयार की गई है। सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक व युवा संगठनों से बातचीत कर फाइनल ड्राफ्ट तैयार होगा। ‘रोजगार के अधिकार’, को मौलिक अधिकारों में शामिल कराने के…
जेपी एक ऊर्जा थे ,रोमांच थे, आत्मीयता से भरी हुई एक प्रतीक्षा थे।आज़ादी के इतिहास को नए सिरे से लिखने की क्रूरता जब किसी दिन थक कर पस्त हो जाएगी, आइंस्टीन जैसा ही कोई संवेदनशील वैज्ञानिक विनोबा और जेपी जैसे…
हमारे समय में ऐसे कई महानायक हुए हैं जिन्होंने इतिहास की धारा को बदलने के प्रयास किए हैं। ऐसे ही एक व्यक्ति लोकनायक जयप्रकाश नारायण रहे हैं जिनकी अगुआई में देश में तानाशाही की पहली कोशिश को सफलतापूर्वक रोका गया…
गांधी जयंती पर विशेष गांधी जी सही अर्थ में महात्मा थे। संसार के बहुत कम लोग इस अर्थ में महान हुए हैं, जिस अर्थ में मोहनदास करमचंद गांधी। वे महान पैदा नहीं हुए थे, न ही महानता उनपर थोपी…
गाँधी की बात की जाए और ‘हिन्द स्वराज’ की बात न हो, यह मुमकिन नहीं। एक तरह से गांधी विचार का सारतत्व उम्र के चालीसवें साल में लिखी उनकी इसी छोटी सी पुस्तिका में है, लेकिन क्या ‘हिन्द स्वराज’ आज…
भांति-भांति की असंख्य विविधताओं वाले भारत में आपस के संवाद के लिए एक सामान्य भाषा की जरूरत आजादी के पहले से महसूस की जा रही थी। महात्मा गांधी हिन्दी को सम्पर्क, संवाद की राष्ट्रभाषा मानकर इस जरूरत को पूरा करना…