लोकतंत्र

विचार : लोकतंत्र में अलोकतांत्रिक व्यवहार

दुनियाभर में वापरी जा रही लोकतांत्रिक प्रणाली व्यवहार में कितनी कारगर है, यह उसके मैदानी अमल से उजागर होता रहता है। व्यक्ति और समाज के स्तर पर लोकतंत्र के कसीदे काढने वाले अपने निजी, राजनैतिक और सामाजिक जीवन में कितने…

स्वतंत्र पत्रकारिता का साथ देने की जरूरत : पी. साईंनाथ

पत्रकारिता और मीडिया को गड्डमड्ड करना और एक ही समझना ठीक नहीं है| आधी सदी पहले वे दोनों एक सरीखे ही रहे हों, पर आज नहीं हैं। देश के मीडिया के बड़े हिस्से पर कारपोरेट सेक्टर का कब्जा है। आज…

लोकतंत्र के सलीब पर सायबर जासूसी की कील !

हुकूमतें तकनीकी रूप से चाहे जितनी भी सक्षम क्यों न हो जाएँ, नागरिकों के मन के अंदर क्या चल रहा है उसका तो पता नहीं कर सकतीं । हां , वे इतना ज़रूर कर सकती हैं कि अगर लोगों ने…

मुझे भी कुछ कहना है, मी लार्ड !

लोकतांत्रिक प्रणाली में विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका आपसी संतुलन बनाकर काम करती हैं, यानि इनमें से कोई भी, किसी तरह की गडबडी करे तो बाकी के अंग उसे सुधारने के लिए अंकुश लगाते हैं, लेकिन मौजूदा दौर की घटनाएं लोकतंत्र…

राष्ट्रीय सरकार के गठन और तत्‍काल पहल किये जाने के लिए लोकतान्त्रिक संस्थान प्रमुखों को लिखा पत्र

सिटिज़न्स फॉर डेमोक्रेसी (सीऍफ़डी) ने की राष्ट्रीय सरकार के बारे में आम राय विकसित करने के लिए संसद का वर्चुअल सत्र बुलाने की मांग सप्रेसमीडिया.इन । नईदिल्‍ली, 23 मई। देश में लोकतंत्र को सुरक्षित रखने और उसे मजबूत बनाने के…

अखिल गोगोई की जीत से असम में नई राजनीति का दौर

अखिल गोगोई असम में भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष करने वाले आरटीआई एक्टिविस्ट के तौर पर जाने जाते हैं। उनकी पहचान बड़े बांधों का विरोध करने वाले, जैव विविधता को बचाने के लिए संघर्ष करने वाले, जैव विविधता पार्क बनाने वाले…

आत्मनिर्भरता के मुखौटे

प्रधानमंत्री की अगुआई में देशभर में ‘आत्‍मनिर्भरता’ की दुंदुभी बज रही है। लगभग हरेक क्षेत्र में आत्‍मनिर्भर बनने की जुगत बिठाई जा रही है, लेकिन क्‍या मौजूदा विकास के ताने-बाने के साथ-साथ वास्‍तविक आत्‍मनिर्भरता संभव हो सकेगी? क्‍या इस आत्‍मनिर्भरता…

लोकतंत्र की लुटिया डूबने, न डूबने देने का चुनाव

कोविड-19 महामारी तक को अनदेखा करके मार्च में करीब दो दर्जन विधायकों को ‘लोकतंत्र की रक्षा करने’ की खातिर अपने अल्‍पमत के पाले में मिलाने वाली ‘भारतीय जनता पार्टी’ और बहुमत गंवाकर गद्दी से उतारी जाने वाली ‘भारतीय राष्‍ट्रीय कांग्रेस,’…

क्‍या गौरव करने लायक बचा है, लोकतंत्र?

हमारे समय का सर्वग्राही सवाल उस लोकतंत्र से है, जिसका नाम लेकर तरह-तरह के रंगों, झंडों वाली राजनीतिक जमातें सत्‍ता पर चढती-उतरती रहती हैं। क्‍या सचमुच हम जिसे सतत वापरते हैं, वह लोकतंत्र ही है? दुनिया के लोकतांत्रिक देशों में…

दो घाटियों की गुहार

नर्मदा और गंगा की तरह कश्‍मीर घाटी भी ‘जीवित इकाई’ मान ली गई होती तो वह इनके साथ मिलकर लोक-समाज से क्‍या कहतीं? प्रस्‍तुत है, कश्‍मीर और नर्मदा घाटी को जानने-समझने के बाद उनकी तरफ से लोक-समाज को लिखा गया…