स्थायी स्तम्भ

गांधी दुनिया से कभी ख़त्म नहीं हो पाएँगे !

राष्ट्रपिता की एक बार फिर हत्या की जा रही है। पहले उनके शरीर का नाश किया गया। फिर उनके आश्रमों और उनकी स्मृतियों से जुड़े प्रतीकों पर हमला किया गया। अब उन्हें मुग़लों के साथ-साथ इतिहास और पाठ्यपुस्तकों से या…

नयी पेंशन योजना या पुरानी पेंशन योजना? क्या है असल कहानी?

दो दशक तक नई पेंशन योजना को आज़माने के बाद कई राज्य फिर से पुरानी की ओर जा रहे हैं। लाखों कर्मचारी सेवानिवृत्ति के बाद बेहतर जीवन की मांग कर रहे हैं, वहीं केंद्र सरकार बार बार वित्तीय संकट का…

क्यों फेल हो रहे हैं अमेरिका के बैंक? भारतीय बैंकों पर क्या असर होगा?

क्यों फेल हो रहे हैं अमेरिका के बैंक? भारतीय बैंकों पर क्या असर होगा? | हमारा पैसा हमारा हिसाब अचानक से एक के बाद एक अमेरिकी बैंक धराशायी हो रहे है। इस बार बॉन्ड मार्केट्स ने उन्हें फेल कर दिया…

कहाँ है एलपीजी सब्सिडी? सरकारी चोरी की कहानी!

गरीब से गरीब के नाम पर सभी को एलपीजी सब्सिडी से बाहर कर दिया गया है। पहले तो नेक काम के नाम पर सब्सिडी छुड़वाई गयी और अब वो गायब ही है। आज एक सिलेंडर की कीमत 1053 रुपये है…

यात्रा ने राहुल को चतुर और कांग्रेस को भय-मुक्त बना दिया !

देश-हित में राहुल की यात्रा का योगदान यह माना जा सकता है कि नागरिक सत्तारूढ़ दल और उसके आनुषंगिक संगठनों के उग्रवादी कार्यकर्ताओं से कम डरने लगेंगे। गौर किया जा सकता है कि सांप्रदायिक विद्वेष की घटनाओं में कमी दिखाई…

भारत जोड़ो यात्रा : राहुल गांधी सरकार के ख़िलाफ़ जन-आंदोलन खड़ा करेंगे ?

इस बात से संदेह दूर हो जाना चाहिए कि ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के ज़रिए राहुल ने 137-वर्षीय पुरानी कांग्रेस को अब अपने अस्तित्व के लिए पूरी तरह से अपने ऊपर निर्भर कर दिया है। वे कांग्रेस के नरेन्द्र मोदी बन…

क्या मोरबी में भी भोपाल होगा ?

मोरबी की दुर्घटना के बाद भोपाल गैस त्रासदी का हवाला देते हुए चेताया गया था कि लोगों की याददश्त कमज़ोर होती है, वे सब कुछ भूल जाएंगे! मोरबी में पुल टूटने की घटना और गुजरात में मतदान के बीच भी…

हमारा पैसा हमारा हिसाब : क्‍या कॉरपोरेटस् हमारे बैंकों को डूबो देंगे ?

क्रेडिटसाइट्स के एक अध्ययन से पता चला है कि भारतीय बैंकों के कुल ऋण का 45% कॉरपोरेट ऋण है। अगर ये ऋण न चुकाये जाएँ तो ये अपने साथ कई बैंकों को डुबो देंगे। इसके बावज़ूद, सरकारी बैंक भी कॉरपोरेट…

हमारा पैसा हमारा हिसाब : मुफ्त की रेवडियों से किसको है डर। क्‍या है असली कहानी।

प्रधानमंत्री से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक मुफ्त सुविधाओं के खिलाफ आम सहमति बनती दिख रही है। गरीबों के लिए मुफ्त या सब्सिडी वाला अनाज, बिजली या स्वास्थ्य सेवाएं अचानक सभी वित्तीय चिंताओं का मूल कारण बन गई हैं। लेकिन कंपनियों…

GST बनाम गब्‍बरसिंह टैक्‍स : हमारा पैसा हमारा हिसाब

जीएसटी की शुरुआत टैक्स प्रणाली को सरल बनाने और डबल टैक्स से बचने के लिए की गयी थी। लेकिन अब हर रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल होने वाली चीज पर टैक्स देना पड़ रहा है। इसमें सबसे नया है- आटा,…