दो दशक तक नई पेंशन योजना को आज़माने के बाद कई राज्य फिर से पुरानी की ओर जा रहे हैं। लाखों कर्मचारी सेवानिवृत्ति के बाद बेहतर जीवन की मांग कर रहे हैं, वहीं केंद्र सरकार बार बार वित्तीय संकट का हवाला दे रही है। यदि धन की कमी मुद्दा है तो क्या राजस्व में अपर्याप्त वृद्धि के बारे में पूछना प्रासंगिक नहीं है? उदारीकरण के बड़े-बड़े वादों और कॉरपोरेट्स को टैक्स में दी गयी भारी छूट का क्या हुआ? क्यों राजस्व की तिजोरी हमेशा शिक्षा,स्वास्थ्य जैसे सामाजिक व्यय में कमी करके ही भरी जाती है! इन्ही सवालों के संदर्भ में पेश है सेंटर फॉर फाइनेंशियल अकाउंटेबिलिटी टीम व्दारा तैयार ‘हमारा पैसा हमारा हिसाब‘ का नया एपिसोड।

नीले धुएँ की धरती : ‘ग्रेट स्मोकी माउंटेन्स’
समाज और सरकार चाहे तो पर्यावरण को पुनर्जीवित किया जा सकता है। इसका एक बेहतरीन उदाहरण अमरीका के टेनेसी और नार्थ कैरोलीना राज्यों की सीमाओं से लगा ‘ग्रेट स्मोकी माउंटेन्स’ है। करीब सौ साल पहले कानून बनाकर प्रकृति को उसके

