योगेश कुमार गोयल

बजट 2026-27 : आम आदमी की आकांक्षाओं पर कितना खरा है बजट?

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत केंद्रीय बजट 2026-27 को सरकार ‘विकसित भारत’ की दिशा में दीर्घकालिक सोच का दस्तावेज़ बता रही है, जबकि विपक्ष ने इसे दिशाहीन करार दिया है। लगातार नौवीं बार बजट पेश कर इतिहास रचने वाली…

स्मृति-शेष : मार्क टुली और भारतीय पत्रकारिता के छह दशक

भारत की आत्मा को शब्द देने वाले पत्रकार मार्क टुली का निधन केवल एक व्यक्तित्व का अंत नहीं, बल्कि संवेदनशील, संतुलित और सत्यनिष्ठ पत्रकारिता के एक युग का अवसान है। बीबीसी की शांत आवाज से उन्होंने भारत को दुनिया से…

गणित को अनुभूति बनाने वाला अमर साधक श्रीनिवास रामानुजन 

भारत में 22 दिसंबर को मनाया जाने वाला राष्ट्रीय गणित दिवस भारतीय बौद्धिक परंपरा और महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन की असाधारण प्रतिभा का स्मरण है। यह दिवस गणित को भय नहीं, जिज्ञासा और नवाचार का माध्यम मानते हुए युवा पीढ़ी…

बोधि दिवस : आत्मज्ञान, जागृति और मानवीय उत्कृष्टता का उत्सव

8 दिसंबर मानव इतिहास की उस अद्वितीय जागृति का उत्सव है, जिसने सिद्धार्थ को बुद्ध बनाया और पूरी मानवता को करुणा, विवेक और आत्मज्ञान का मार्ग दिया। बोधि दिवस हमें यह समझाता है कि सदियों बाद भी शांति और सत्य…

सदैव आकर्षण का केन्द्र रहा है खूबसूरत लाल ग्रह

रात के आकाश में टिमटिमाते तारों के बीच एक लाल चमकता ग्रह सदियों से मानव जिज्ञासा का केंद्र रहा है—मंगल। इसी रहस्यमय ‘रेड प्लेनेट’ को जानने और मेरिनर-4 के ऐतिहासिक प्रक्षेपण को याद करने के लिए हर वर्ष 28 नवंबर…

लोकतांत्रिक आत्मा का जीवंत घोषणापत्र है संविधान

26 नवम्बर भारत की लोकतांत्रिक यात्रा का वह ऐतिहासिक क्षण है, जब देश ने समानता, न्याय, स्वतंत्रता और बंधुत्व पर आधारित अपने भविष्य की दिशा तय की। संविधान दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि उस आधुनिक चेतना का सम्मान है,…

विश्वास से परिवर्तन की ओर भविष्य को गढ़ता विज्ञान

हर वर्ष 10 नवंबर को मनाया जाने वाला ‘शांति एवं विकास के लिए विश्व विज्ञान दिवस’ हमें याद दिलाता है कि भविष्य की चुनौतियों का समाधान विज्ञान की प्रगति और समाज के विश्वास पर आधारित है। यूनेस्को की इस वर्ष…

रेल सुरक्षा : सुधार की पटरियों पर कब चढ़ेगा सिस्टम?

भारत की रेल पटरियां देश की जीवनरेखा हैं, लेकिन बार-बार होने वाली दुर्घटनाएं इस तंत्र की सुरक्षा संस्कृति पर गंभीर सवाल उठाती हैं। बिलासपुर के लालखदान में मेमू ट्रेन और मालगाड़ी की टक्कर में 11 यात्रियों की मौत सिर्फ एक…

धमाकों से नहीं, दीयों से मनाएं दीवाली का उत्सव

दीवाली खुशियों और उजालों का त्योहार है, पर जब यही रोशनी धुएं और शोर में बदल जाए, तो उसका अर्थ खो जाता है। अत्यधिक पटाखों ने इस पर्व की पवित्रता और सादगी को प्रदूषण के धुंए में ढक दिया है।…

बुजुर्गों की मुस्कान में ही छिपा है समाज का भविष्य

भारतीय संस्कृति में बुजुर्गों का सम्मान सदैव सर्वोपरि माना गया है, किंतु आज वृद्धों की उपेक्षा और अत्याचार गंभीर चिंता का विषय बन गए हैं। संयुक्त राष्ट्र द्वारा 1991 से प्रतिवर्ष 1 अक्टूबर को अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस मनाने की पहल…