वीरेन्द्र कुमार पैन्यूली

वंचितों से और भी दूर हुआ जलवायु न्याय

पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन के दुख दूबरे होते दुनिया के अमीर देश गाहे-ब-गाहे मिल-बैठकर अपनी चिंताएं उजागर करते रहते हैं, लेकिन उनकी इस कवायद से किसी का कुछ खास बनता-बिगड़ता नहीं है। पिछले साल के अंत में इसी तरह का…

बदहाल हैं, यम की बहन यमुना

पुराणों में यमुना को मृत्यु के देवता यम की बहन बताया गया है, लेकिन हमारी आती-जाती सरकारें और जहां-का-तहां बैठा समाज इस धारणा को भी ठेंगे पर मारता है। देश की एन राजधानी में यमुना को बदहाल करने में किसी…

केदारनाथ का पैदल मार्ग : कितना सुरक्षित? 

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में 11,968 फीट की ऊंचाई पर बसा केदारनाथ मंदिर शीतकाल में 6 महीने बंद रहने के बाद अब 2 मई को फिर से खुलने वाला है। चारधाम यात्रा के इस हिस्से में लाखों श्रद्धालु आते हैं,…

अंतर्राष्‍ट्रीय : ट्रंप की ताजपोशी से बढ़ेगा धरती का तापक्रम

बीस जनवरी 2025 को होने वाली अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ताजपोशी राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक उथल-पुथल के अलावा पर्यावरण को भी भारी संकट में डाल सकती है। ट्रंप ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी अरुचि पिछले कार्यकाल में ही…

उत्तराखंड : आपदा की अनदेखी के नतीजे

दिल्ली में नकली केदारनाथ धाम खड़ा करने के मंसूबे बांधने वाले हमारे समाज को ग्यारह साल पहले उत्तराखंड के असली केदारनाथ धाम में हुई भीषण त्रासदी कितनी याद है? क्या तीर्थाटन को मौज-मस्ती के पर्यटन में तब्दील करते लाखों-लाख कथित…

फिसलन की राह पर गैर-सरकारी संस्थाएं

एक जमाने में मिशन माना जाने वाला सामाजिक कार्य आजकल एक व्यवसाय का दर्जा हासिल कर चुका है। ऐसे में जाहिर है, व्यवसाय की रीति-नीति भी सामाजिक कार्यों का हिस्सा बनती हैं। क्या होते हैं, इस बदलाव के नतीजे? आज…

COP28 : पाखंड का पर्यावरण

‘कॉप – 28’ : 30 नवंबर से 12 दिसंबर 2023 पर्यावरण को लेकर सत्तर के दशक में उभरी राजनीतिक सत्ताओं की चिंता अब पाखंड में तब्दील होती जा रही है। तरह-तरह के वैश्विक सम्मेलनों में दुनियाभर के राजनेता भांति-भांति के दावे-वायदे…

केदारनाथ धाम : आपदा का एक दशक

एक दशक पहले केदारनाथ मंदिर के ऊपर से उठे बवंडर ने मंदिर समेत पूरी केदार-घाटी को तहस-नहस कर दिया था। जैसा कि होता है, दुर्घटना के प्रभाव में तरह-तरह के सुझाव-सलाहें भी आईं जिनका मूल स्वर तीर्थ-यात्राओं को पर्यटन बनाए…

उत्तराखंड : संवेदनहीनता की चिंताजनक मिसालें

जोशीमठ में जमीन के लगातार धंसने को लेकर ‘इसरो’ की रिपोर्ट के आंकड़ों से संवेदनहीनता पुष्ट हुई। ‘इसरो’ के मुताबिक 22 दिसम्बर 2022 और 8 जनवरी 2023 के बीच जोशीमठ में भू-धंसाव 5.4 सेन्टीमीटर हुआ था, जबकि इसके पहले के…

पंचायती राज में गांधी की प्रासंगिकता

गांधी के नजरिए से मौजूदा लोकतंत्र की समीक्षा की जाए तो उसमें राज्य की सबसे छोटी प्रशासनिक इकाई ग्रामसभाएं और ग्राम-पंचायतें प्रमुखता से उभरती हैं, लेकिन धीरे-धीरे हमारे लोकतंत्र की बुराईयां गांव और उनके प्रशासनिक ताने-बाने तक पहुंच गई हैं।…